राम के ही जाप से
राम के ही जाप से
है अवध बलिहारी, पधारे है धनुर्धारी,
दूर है अब अयोध्या, वियोग के शाप से,
राम हैं पधारे जब, धन्य हुआ जग सब,
गूँज उठा जयकारा, नगाड़े के थाप से,
मान और नाम मिला, फूल सा जीवन खिला,
भाग्य मेरे खुल गए, राम के ही जाप से।
कर जोर भजूं राम, पावन तुम्हारा नाम,
करना सदा ही कृपा, विनती है आप से।
मन कर्म वचन से, मानवता के धर्म से,
लाएंगे नव चेतना, राम के प्रताप से।
जन कल्याण के लिए, समस्त प्राणि के लिए,
राम ही दिलाएं मुक्ति, बंधनो के शाप से,
सुबह शाम श्री राम, और नही कोई काम,
महा कृपा हुई प्रभु, राम के ही नाम से,
ह्रदय उतारा राम, राम राम सिया राम,
कलुष मिटे हैं सारे, किए पश्चाताप से,
बदली ये सारी धरा, उदित है भाग्य तारा,
जीवन सँवारा मेरा, मात्र पदचाप से,
धुल गए सारे पाप, मिले जो प्रभु जी आप,
मिला छुटकारा हमें, समस्त संताप से।

आभा गुप्ता
इंदौर (म. प्र.)
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