रामलला | Ram Lala

रामलला 

Ram Lala

( 2 ) 

 

देता अवध घुमाय मोर सजनवाँ ना,
रामलला जी कै करित दर्शनवाँ ना।

चलत डहरिया पिराई नहीं गोड़वा,
छूट जाई एकदिन देखा हाथी-घोड़वा।
पूरा होई जाई अपनों सपनवाँ ना,
रामलला जी कै करित दर्शनवाँ ना।
देता अवध घुमाय मोर सजनवाँ ना,
रामलला जी कै करित दर्शनवाँ ना।

सरयू नहाई के चढ़ाईब माला-फुलवा,
माखन और मिश्री खियाईब पूड़ी-हलवा।
देवी-देवता आए प्रभु के भावनवाँ ना,
रामलला जी कै करित दर्शनवाँ ना।
देता अवध घुमाय मोर सजनवाँ ना,
रामलला जी कै करित दर्शनवाँ ना।

काशी -विश्वनाथ जी कै दर्शन हम कइली,
दूध, बेल-पात, अक्षत शिव पे चढ़उली।
उहाँ तृप्त होई अपनों नयनवाँ ना,
रामलला जी कै करित दर्शनवाँ ना।
देता अवध घुमाय मोर सजनवाँ ना,
रामलला जी कै करित दर्शनवाँ ना।

दुनिया कै दाता कइसे भइलन बिना घरवा,
बनी गयल राममंदिर देखा ऊ जिगरवा।
प्रभु के स्वागत में उमड़ल जहनवाँ ना,
रामलला जी कै करित दर्शनवाँ ना।
देता अवध घुमाय मोर सजनवाँ ना,
रामलला जी कै करित दर्शनवाँ ना।

———-

( 1 ) 

( गारी के धुन में ) 

मुखड़ा :

रामलला फिर अवध विराजे हो, ( 2)
उहाँ आए देखन नर -नारी।
हाँ, सियाराम के भजो,
उहाँ आए देखन नर -नारी,
हाँ, सियाराम के भजो।

(1)
फूलों की क्यारी-सी गमके अयोध्या हो,
दुल्हन के जैसी सजल अयोध्या हो।
बाटे ऊ तो मोक्ष कै पिटारी,
हाँ, सियाराम के भजो,
उहाँ आए देखन नर -नारी,
हाँ, सियाराम के भजो।
रामलला फिर अवध विराजे हो, ( 2)
उहाँ आए देखन नर -नारी।
हाँ, सियाराम के भजो,
उहाँ आए देखन नर -नारी,
हाँ, सियाराम के भजो।

(2)
रामजी कै देखली सुन्दर नयनवाँ हो,
एक झलक पावै खातिर उमड़ल जहनवाँ हो।
पूरी दुनिया में सजल पूजा थारी,
हाँ, सियाराम के भजो,
उहाँ आए देखन नर -नारी,
हाँ, सियाराम के भजो।
रामलला फिर अवध विराजे हो, ( 2)
उहाँ आए देखन नर -नारी।
हाँ, सियाराम के भजो,
उहाँ आए देखन नर -नारी,
हाँ, सियाराम के भजो।

(3)
तप-त्याग -संयम कै बाटे ऊ नगरिया हो,
खुश बाटे चाँद-सूरज,खुश बा अँजोरिया हो।
त्रिभुवन कै बाटे ऊ दुलारी,
हाँ, सियाराम के भजो,
उहाँ आए देखन नर -नारी,
हाँ, सियाराम के भजो।
रामलला फिर अवध विराजे हो, ( 2)
उहाँ आए देखन नर -नारी।
हाँ, सियाराम के भजो,
उहाँ आए देखन नर -नारी,
हाँ, सियाराम के भजो।

Ramakesh

रामकेश एम यादव (कवि, साहित्यकार)
( मुंबई )

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