Ram navmi kavita

रामनवमी | Ram navmi kavita

रामनवमी

( Ram navmi )

 

रघु कुल में उत्पन्न दशरथ लाल राम
कोशल्या की कोख से दशरथ लाल राम

सनातन में शुभ दिवस नवमी राम जन्म
अवध नगरी जगमग हुआ राम का जन्म

घर में हर्ष अपार सजी आंगन रंगोली
नगर में ख़ुशी छाई ढोल बजाता ढोली

थाल भर मोतियों दासियां कर रही दान
गाती गीत संगीत सखियां बड़े आदर मान

केकई सुमित्रा कोशल्या तीनों रानियां अति प्रसन्न
रनिवास में रंग मंच सजाया मन प्रसन्न

‘कागा’ आओ सकल मिल राम नवमी मनायें
सनातन का पावन पर्व प्रेम पूर्वक मनाये

 

कवि साहित्यकार: तरूण राय कागा

पूर्व विधायक

यह भी पढ़ें :-

राम तेरी लीला न्यारी | Geet Ram Teri Leela Nyari

Similar Posts

  • पिता बेटी संवाद पर कविता | Pita Beti Samvad

    पिता बेटी संवाद पर कविता ( Pita beti samvad par kavita )   बेटी अपने घर आने को भी पूछना पड़ता है पराया कर दिया है पिता आपने पूछना पड़ता है बेशक में आपकी बेटी हूं पत्नी किसी की आपने मुझे बना दिया है आपकी एक आवाज में दौड़ कर आने वाली मैं जुड़ गई…

  • अर्थ हीन | Arth-Heen

    अर्थ हीन ( Arth-Heen )    एक स्त्री के लिए अच्छा घर,अच्छा पति अच्छे बच्चे, सास ससुर और ,एक अच्छी खासी आमदनी भी तब,किसी काम की नही होती जब, उस पर लगा हो बंदिशों का पहरा किसी से भी बात न करने की मनाही उठती हुई शक की नजरों के साथ हर बात पर व्यंग…

  • शिक्षण सेवा के २१ वर्ष

    शिक्षण सेवा के २१ वर्ष ****** ख़ुशी का है दिन आज- मना लो खुशी, आज ही के दिन हुई थी- तुम्हारी नियुक्ति। ली थी तुमने- पद , गोपनीयता , सेवा की शपथ, खायी थी कसम होगे न पथ भ्रष्ट। आज २१वीं बरसी पर दिल पर हाथ रख- पूछो अन्तर्मन से कुछ सवाल, इन वर्षों में,…

  • क़ुबूलनामा | Qubool Nama

    क़ुबूलनामा ( Qubool nama ) प्यार छुपाना क्यों बताती क्यों नहीं, अपने जज़्बात तुम जताती क्यों नहीं, मिलना न मिलना बात है मुकद्दर की अपना हूँ एहसास कराती क्यों नहीं। इश्क़ में आँसू नहीं हम चाहते है खुशी, बात ये अपनों को समझाती क्यों नहीं। दुश्मन है जो भी हमारी मोहब्बत के, बग़ावत में आवाज़…

  • रिश्तों की डोर | Kavita Rishton ki Dor

    रिश्तों की डोर ( Rishton ki Dor ) घरौंदे टूटकर फिर बनते हैं बदलते हैं महल खंडहर और खंडहर महल में सतत चलती ही रहती है यह प्रक्रिया हार के बाद कभी जीत न मिली हो ऐसा नहीं होता किसी के साथ कोशिश तो करिये और एक बार शायद सफलता इसी मे हो होती नहीं…

  • दीप | Deep

    दीप ( Deep )    न सही विश्वास मेरा, पूछ ले उस दीप से। जो रात सारी रहा जलता, साथ मेरे बन प्रतिबम्ब।। हाल सारा जायेगा कह, दीप वह जो बुझ गया। जगने का सबब मेरा, और जलने के मजा।। मांगतीं विश्वास का बल, देख ले इक नजर भर। बस वही लेकर मैं संबल, जलती…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *