रॉयल्टी

रॉयल्टी | Royalty

2007 की बात है। सरकारी इंटर कॉलेज में तैनात गणित के शिक्षक विनय सर की शादी में मैं अपने मित्र प्रदीप के साथ… जब उनके घर रिसेप्शन पार्टी में पहुंचा तो मैंनें एक बात नोटिस की… विनय सर को सब चरन कहकर ही पुकार रहे थे। विनय नाम से कोई भी नहीं पुकार रहा था।

हैरत की बात यह भी थी कि वे विनय नाम से कम तथा चरन नाम से ज्यादा सुन रहे थे। यह सब देखकर मुझे बड़ा अजीब लगा। मैंने अपने साथ गए अपने मित्र प्रदीप को यह बात बताई।

प्रदीप ने मुझसे कहा- “हो सकता है कि विनय सर का घर का नाम चरन ही हो और कागजों में विनय। इसलिए घर के सब लोग विनय को चरन कहकर ही पुकार रहे हैं। तुम अपने दिमाग पर ज्यादा जोर मत डालो। चरन हो या विनय, क्या फर्क पड़ता है? वैसे भी हर व्यक्ति के ज्यादातर दो नाम होते हैं। घर का अलग और बाहर का अलग। जैसे मुझे भी घर पर सब लोग बबलू कहते हैं लेकिन कागजों में मेरा नाम प्रदीप है।”

“हाँ, तुम सही कहते हो। ऐसा हो सकता है।” इस बात पर मैंने अपनी सहमति दी लेकिन मेरे मन में विनय-चरन नाम को लेकर शंका जरूर पैदा हो गई थी। समय के साथ बात आई-गई हो गई। मैं इस बात को पूरी तरह भूल चुका था।

इस घटना के 14 साल बाद, एक दिन पता चला कि विनय सर फर्जी कागजों पर ही शिक्षक की नौकरी कर रहे थे। उनका असली नाम चरन ही था। उनको नौकरी करते हुए लगभग 20 वर्ष हो गए थे।

उन्होंने अपनी नौकरी में जिनके दस्तावेजों का प्रयोग किया था, वे चरन के सगे जीजा विनय थे। वे एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर के पद पर तैनात थे।

उन्होंने अपनी हर कक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी। विनय के दस्तावेजों पर नौकरी हथियाने के उद्देश्य से विनय और चरन में तय हुआ था कि चरन प्राप्त सरकारी तनख्वाह से प्रतिमाह आजीवन 40% विनय को देगा। ये रुपये एक तरह से उन दस्तावेजों के इस्तेमाल की रॉयल्टी होगी। लेकिन ऐसा हो ना सका।

उनके संबंधों में दरार आ गई। 19 साल लगातार तनख्वाह से 40% देने के बाद, एक दिन चरन ने विनय को रॉयल्टी देने से साफ-साफ मना कर दिया। उसने कहा कि वह अब और रुपए नहीं दे पायेगा क्योंकि बच्चे बड़े हो रहे हैं, उनकी पढ़ाई-लिखाई, कैरियर, शादी के बारे में भी सोचना है।

यह बात विनय को बुरी लगी। उसने चरन की उच्च अधिकारियों से शिकायत करने की धमकी भी दी, लेकिन चरन पर कोई फर्क ना पड़ा। उसे यकीन था कि उसका सगा जीजा उसके साथ ऐसी घिनौनी हरकत नहीं करेगा।

लेकिन ऐसा हुआ। विनय ने चरन की उच्च अधिकारियों से शिकायत कर दी। चरन के कागजों की गहनता से जांच की गई जिसमें उसके सभी कागजात फर्जी पाए गए और यह पाया गया कि उसने अपने जीजा के कागजों का… चोरी से इस्तेमाल करके, धोखाधड़ी से नौकरी हथियाई थी।

उसको तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया गया। जितनी भी धनराशि उसने सरकार से वेतन के रूप में प्राप्त की थी, उस समस्त धनराशि के ब्याज सहित वसूली के आदेश हो गए।

चरन का सब कुछ बर्बाद हो गया। वह सड़क पर आ गया। उसके घर परिवार की कुर्की हो गई। अब चरन घर से बहुत दूर एक प्राइवेट कंपनी में ही काम करके घर का खर्चा-पानी चल रहा है।

अब उसकी हिम्मत गांव के लोगों से नजर मिलाने व उनके सवालों के जवाब देने की नहीं होती इसलिए उसने गाँव आना-जाना ही बंद कर दिया है। उसके अपनी बहन से भी हमेशा के लिए संबंध खराब हो गए। अगर वह अपने जीजा को लगातार तनख्वाह का 40% हिस्सा देता रहता तो उसकी यह दुर्दशा ना होती।

विचारणीय बिंदु:-

प्रायः अखबारों में आए दिन यह खबर पढ़ने को मिल ही जाती है कि अमुक व्यक्ति के कागजात फर्जी मिले या अमुक व्यक्ति दूसरे जनपद में किसी और के कागजात पर नौकरी करता पाया गया।

उसको बर्खास्त करके वसूली के आदेश दिए गए। देखा जाए तो बेरोजगारी के इस दौर में जहां सरकारी नौकरी पाने की… मिलने की बिल्कुल उम्मीद ना हो, जहाँ मेरिट में सबसे ऊपर आने का… अच्छी परसेंटेज लाने का… दबाव हो।

जहाँ कंपटीशन बहुत तगड़ा हो, लाखों की संख्या में अभ्यर्थी हों और सरकारी नौकरी संख्या में मात्र चुनिंदा हो। वहाँ नौकरी पाने के लिए व्यक्ति गलत राह अपनाने को मजबूर हो जाता है।

ऐसे में लोग या तो अपने फर्जी कागजात (ज्यादा अंक के) बनवा लेते हैं ताकि उनको प्राइवेट कंपनियों में आसानी से नौकरी मिल सके। प्राइवेट वाले कागजों की जांच भी नहीं करवाते, जबकि सरकारी नौकरी में कागजों की ढंग से जांच होती है। आज भ्रष्टाचार हर जगह है।

धोखाधड़ी, रिश्वतखोरी हर जगह है। रिश्वत देकर बहुत बार जांच भी फॉर्मेलिटी बन जाती है, गलत कागजात को ही सही साबित कर दिया जाता है… या फिर विनय जैसे व्यक्ति (जो पहले से ही प्राइवेट कंपनियों में उच्च पदों पर आसीन है) से सांठ गांठ करके बेरोजगार व्यक्ति उनके कागजों पर आजीवन नौकरी करते हैं।

अगर कोई दिक्कत नहीं आती तो सकुशल रिटायर भी हो जाते हैं, मजे की जिंदगी जीते हैं। सरकार को इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है कि वह बेरोजगारों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार के साधन उपलब्ध कराये, इससे बेरोजगारी की समस्या तो दूर होगी ही… साथ ही व्यक्ति रोजगार पाने के लिए गलत रास्ते पर जाने से बचेगा, अपराधों में भी कमी आएगी।

गरीबी की समस्या, मानसिक तनाव की समस्या से भी मुक्ति मिलेगी तथा पारिवारिक दिक्कतों जैसे पारिवारिक कलह, तलाक एवं अन्य सामाजिक समस्याओं पर भी अंकुश लग सकेगा।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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