Runa lakhnavi poetry

अच्छाई तुम्हारी पहचान | Runa lakhnavi poetry

अच्छाई तुम्हारी पहचान

( Achai tumhari pehchan )

 

मुस्कुराकर, न जाने कितने जंग जीते हैं
तो क्या हुआ, अगर एक बार हार भी गए तो!
तुम फूल की तरह हमेशा महकना
किसी की बात से कभी न बहकना!

 

काँटों से भरा रास्ता तो पार कर लिया
और जिस सादगी से तुम ये जीवन जी रहे !
हमेशा सभी के दिलों में धड़कना
गलत रास्तों में कभी न भटकना!

 

लक्ष्य जब न दिखे, कुहासा हो हर जगह
तुम ध्यान में उस ईश को रखना और
हर दिन तुम खुद निखरना
किसी भी आंधी से न बिखरना!

 

तुम्हारी अच्छाई ही तो तुम्हारी पहचान है
तो क्या हुआ, अगर किसी को दिखता नहीं!
गिरते हुए को सहारा दे, तुम भी संभलना
और अपने आपको, कभी न बदलना!

 

🍀

Runa lakhnavi poetry

कवयित्री: – रूना लखनवी

यह भी पढ़ें :-

हर तिमिर मिट जाए | Diwali ki kavita in Hindi

Similar Posts

  • बरखा बहार आई | Kavita Barkha Bahar Aayi

    बरखा बहार आई ( Barkha Bahar Aayi ) 1. बरखा बहार आई,मौसम मे खुशबू छाई | मिट्टी की खुशबू सोंधी,पैरों के साथ आई | बारिस मे अमृत बरसा,चौतरफा हरियाली छाई | बारिस की बूँन्दे जैसे,कलियों-पत्तों मे मोती आईं | 2.बादल मे इन्द्र-धनुष,रंगों की टोली लेकर | आई है बरखा रानी,चिडियों की बोली लेकर | कोयल…

  • धीरे-धीरे | Poem Dhire Dhire

    धीरे-धीरे ( Dhire Dhire ) धीरे-धीरे शम्मा जलती रही, रफ्ता-रफ्ता पिंघलती रही ! दिल तड़पता रहा पल पल, रूह रह-रह मचलती रही ! शोला-जिस्म सुलगता रहा, शैनेः शैनेः रात ढलती रही ! ख़्वाब परवान चढ़ते रहे, ख़्यालो में उम्र टलती रही ! धड़कने रफ्तार में थी ‘धर्म’ सांसे रुक-रुक चलती रही !! डी के निवातिया…

  • Kavita धीरे-धीरे

    धीरे-धीरे ( Dhire Dhire )     साजिश का होगा,असर धीरे-धीरे। फिजाँ में घुलेगा ,जहर धीरे-धीरे।   फलाँ मजहब वाले,हमला करेंगे, फैलेगी शहर में,खबर धीरे-धीरे।   नफरत की अग्नि जलेगी,हर जानिब, धुआँ-धुआँ होगा,शहर धीरे-धीरे।   मुहल्ला-मुहल्ला में,पसरेगा खौप, भटकेंगे लोग दर,बदर धीरे-धीरे।   सियासत के गिद्ध,मँडराने लगेंगे, लाशों पर फिरेगी,नज़र धीरे-धीरे। कवि : बिनोद बेगाना जमशेदपुर, झारखंड…

  • मेरा भाई है वो | Mera Bhai Hai Wo

    मेरा भाई है वो ( Mera Bhai Hai Wo )   क्या कहूं, किसे कहूं, कौन है वो, मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि है वो, ना शिकायतें उसे मुझसे, ना शिकवा करे वो, मेरी हर बात बिन कहे ही समझ जाता वो, कब, कहां,कैसे पता नहीं, पर मेरे जीवन का सबसे अहम हिस्सा है…

  • वट सावित्री व्रत | Kavita Vat Savitri Vrat

    वट सावित्री व्रत ( Vat Savitri Vrat ) ( 2 ) अल्पायु सत्यवान का, सावित्री संग व्याह हुआ, दृढ़ संकल्पित सावित्री को, इस बात से भय जरा न हुआ, महाप्रयाण के दिन यमराज, लेने आए जब प्राण सत्यवान, संग सावित्री भी चलीं, तब दिए यमराज वरदान, थी ज्येष्ठ मास की अमावस्या, वट के नीचे सावित्री…

  • राम अनुपमा | Ram Anupama

    राम अनुपमा ( Ram Anupama )   राम अनुपमा,उत्तम जीवन मर्यादा आह्वान जीवन आभा सहज सरल, शीर्ष वंश परिवार परंपरा । स्नेहिल दृष्टि उदार ह्रदय, वरित प्राणी जीव जंतु धरा । समता समानता भाव दर्शन, मुखमंडल नित सौम्य मुस्कान । राम अनुपमा,उत्तम जीवन मर्यादा आह्वान ।। तज राजसी ठाठ बाट, वनवास सहर्ष स्वीकार । निज…

One Comment

  1. बहुत सुन्दर भाव और शब्दों का चयन, रूना. मेरी ढेर सारी शुभकामनायें तुम्हें.

    मीतू मिश्रा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *