सब अदा हो गये
सब अदा हो गये
प्यार के वादे जब सब अदा हो गये
सारे शिकवे गिले ख़ुद हवा हो गये
इस इनायत पे मैं क्यों न क़ुर्बान हूँ
एक पल में वो ग़म आशना हो गये
उनकी क़ुर्बत से आता है दिल को सुकूंँ
दर्द- ओ- ग़म की वही अब दवा हो गये
दिल के मुंसिफ का हर फ़ैसला था गजब
ज़ुल्म कर के भी वो बेख़ता हो गये
हमने पतवार सौंपी थी क्या आपको
दूर साहिल से हम नाख़ुदा हो गये
दौरे- उल्फ़त का हर पल ही रंगीन था
अब जुदाई में लम्हे सज़ा हो गये
वक़्त की ऐसी साग़र चली आँधियाँ
एक पल में ही दोनों जुदा हो गये

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003
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