Hawa ko Aur Hawa Dete ho

हवा को और हवा देते हो | Hawa ko Aur Hawa Dete ho

हवा को और हवा देते हो

( Hawa ko aur hawa dete ho )

 

आती है आंधी क्यों तूफान बना देते हो।
मसला हो घर का तलवार तना देते हो।

भूल गए भाईचारा प्यार की मीठी बातें।
महकते उपवन को वीरान बना देते हो।

चलती है हवाएं हवा को और हवा देते हो।
बदलाव की बहारों में कई मोड़ ला देते हो।

बदलती दुनिया सारी वक्त बदलता रहता।
इंसान हो क्यों इंसान में रोष जगा देते हो।

प्यार की बातें करके यूं हमको दगा देते हो।
मन का चैन हरके फिर हमको भगा देते हो।

हमने चाही भलाई यूं निखर आओ शिखर पे।
मुंह मोड़कर हमसे मुश्किलें और बढ़ा देते हो।

गीत सुहाने सुनाकर महफिल महका देते हो।
खिलते हुए चमन में यार बहार बहा देते हो।

अधरो से बहती है रसधार खुशबू को लिए।
दिलों की धड़कनों में भी प्यार जगा देते हो।

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

साधक शारदे का | Sadhak Sharde ka

Similar Posts

  • दुनिया के

    दुनिया के भाग फूटे पड़े हैं दुनिया के।पांव उखड़े पड़े हैं दुनिया के। खेल बिगड़े पड़े हैं दुनिया के।दाम उतरे पड़े हैं दुनिया के। दौर कैसा है यह तरक़्क़ी का।काम सिमटे पड़े हैं दुनिया के। जिस तरफ़ देखिए धमाके हैं।ह़ाल बिगड़े पड़े हैं दुनिया के। बन्दिशों के अ़जब झमेले हैं।हाथ जकड़े पड़े हैं दुनिया के।…

  • मर जायेगा | Ghazal Mar Jayega

    मर जायेगा ( Mar Jayega )   तू जो छोड़ेगा तो बेमौत ही मर जायेगा शाख से टूट के पत्ता ये किधर जायेगा। उसके वादे का क्या है वो तो करेगा लेकिन ऐन वो वक्त पे वादे से मुकर जायेगा। इन दिनों ही है खुली उसकी हकीक़त मुझ पे लग रहा अब वो मेरे दिल…

  • देख लो | Dekh Lo

    देख लो जश्न अपनी हार का इन महफ़िलों में देख लोज़ाम टकराते हुए इन अफ़सरों में देख लो चीख कितना यह रहे अधिकार को तेरे लिएअब ठहर कर आप इनकी नीतियों में देख लो ये उपासक प्रेम के कितने बड़े है क्या कहूँआज इनपे आप उठती उँगलियों में देख लो लूटकर ये अस्मते खूँ की…

  • कर रहा मनुहार है

    कर रहा मनुहार है क्यों अकारण कर रहा मनुहार हैबात तेरी हर मुझे स्वीकार है मेरे होंठो पर तुम्हारी उंगलियाँमैं समझता हूँ यही तो प्यार है तेरा यह कहना तुम्हें मेरी क़सममुझ अकिंचन को यही उपहार है बात तेरी मान तो लूँ मैं मगरसामने मेरे अभी संसार है दे दिया जीने का मुझको रास्तातेरा यह…

  • जैसा मैं चाहती थी वैसा वो कर रहा है

    जैसा मैं चाहती थी वैसा वो कर रहा है जैसा मैं चाहती थी वैसा वो कर रहा हैदिल को मगर न जाने क्या फिर अखर रहा है। उसकी वो सर्द महरी पत्थर के जैसा लहज़ाअब ये बता रहा है सब कुछ बिखर रहा है। जो है खुशी मयस्सर उसमें नहीं बशर खुशजो ख़्वाहिशात बाकी बस…

  • मिलता कैसे सहारा नये साल में

    मिलता कैसे सहारा नये साल में मिलता कैसे सहारा नये साल मेंकर रहे सब किनारा नये साल में चमके किस्मत का तारा नये साल मेंकर दो कुछ तो इशारा नये साल में भर गया दिल हमारा उमंगों से अबदेखा ऐसा नजारा नये साल में कोई तरकीब ऐसी लगा लीजियेहो सुकूँ से गुज़ारा नये साल में…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *