Sangharsh ki Dagar

मैं संघर्षों की डगर पे रहता हूं | Sangharsh ki Dagar

मैं संघर्षों की डगर पे रहता हूं

( Main sangharsh ki dagar pe rahta hoon )

 

मैं संघर्षों की डगर पे रहता हूं।
जाने कितने तूफान सहता हूं।

हौसला ही रहा हथियार मेरा।
बन भावों की धार बहता हूं।

बाधाएं सुखसागर हो जाती।
मुश्किलें वापस चली जाती।

विश्वास है शिव भोलेनाथ पे।
आस्था अधर मुस्कान लाती।

जिंदगी के जो तजुर्बे पाए हैं।
मोती अनुभव के सजाए हैं।

कला कौशल हुनर सीखा है।
मंच किरदार हमने निभाए हैं।

 

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

परवाज उड़ान कल्पनाओं की | Parwaz

Similar Posts

  • मधु-मक्खी | Madhumakhi par kavita

    मधु-मक्खी ( Madhumakhi )   मधु-मक्खी की महानता …..| 1.सौ शहर-सौ खेत गई, सौ कलियों से मुलाकात हुई | साथ मे लाखों साथी लेकर, सौ गलियों से शुरुवात हुई | मुख मे मधुरस भरकर, पहुँच गई अपने ठिकाने मे | दिन-रात मेहनत करती, लगती हैं शहद जुटाने मे | मधु-मक्खी की महानता …..| 2.फूलों से…

  • वक्त कब करवट बदलें | Waqt Kab

    वक्त कब करवट बदलें ( Waqt kab karwat badle )    वक्त कब करवट बदल ले, क्या-क्या खेल दिखाता है। वक्त कहकर नहीं बदलता, समय चक्र चलता जाता है। मौसम रंग बदलता रहता, पल-पल जब मुस्काता है। कालचक्र के चक्रव्यूह में, नव परिवर्तन तब आता है। समय बड़ा बलवान प्यारे, बदलते किस्मत के तारे। गुजरा…

  • तुम आ जाते सावन में घर | Sawan mein

    तुम आ जाते सावन में घर ( Tum aa jate sawan mein ghar )   सच कहती हूॅं तेरे बिन मुझे कुछ अच्छा न लगता, तुम आ जाते सावन में घर तो सावन यह लगता। मन में आशाएं बड़ी-बड़ी थी कमी तुम्हारा लगता, इस जीवन में सफ़र तेरे बिन अब अधूरा लगता।। आपसे अच्छा हम-दर्द…

  • बरसाने की राधै | Barasane ki Radhe

    बरसाने की राधै ( Barasane ki Radhe )   वृंदावन में बसे गोवर्धन गिरधारी, बरसाने की राधै रानी लगे प्यारी। यमुना किनारे राधा श्याम पुकारे, खोजते- खोजते राधा रानी हारी।। मुरली बजाते आये कृष्ण-मुरारी, राधा रानी पानी घघरी लेके आई। दोनों यूँ मिले क़दम पेड़ के नीचे, बहुत दिनों से नही मिले हो जैसे।। राधा…

  • रास्ते | Raste

    रास्ते ( Raste )    खुले हैं अनगिनत रास्ते बंद नहीं द्वारा किसी का करना है चयन आपको इस पर बंधन नहीं किसी का रिश्ते भी निभाने हैं आपको पानी है कामयाबी भी चलना भी होगा अपने ही कदमों से बनानी होगी पहचान भी अलग से ही बाधाओं का जाल होगा उलझनों का जंजाल होगा…

  • आजमाने की खातिर | Ghazal Aazmane ki Khatir

    आजमाने की खातिर ( Aazmane ki khatir )   वो अक्सर मुझे आज़माने की खातिर। जलता रहा खुद जलाने की खातिर।। मुहब्बत में आया तो इक बात समझी, ये आंखें हैं आंसू बहाने की खातिर।। लुटाकर के सब कुछ ये अंजाम देखा, मिला न कोई दिल लगाने की खातिर।। उजाड़े थे जिसने कई घर सुकूं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *