Sena diwas par kavita

सेना दिवस | Sena diwas par kavita

सेना दिवस!

( Sena diwas )

ऐ! मेरे वतन के लोगों,
जरा याद करो कुर्बानी।
फिर आया सेना दिवस ये,
है कोई न इसका सानी।

इनके चलते ही घरों में,
हम चैन की नींद हैं लेते।
ये नींद गंवाकर अपनी,
सरहद की हिफाजत करते।
रखकर ये आँख में मस्ती,
रचते हैं अमर कहानी।
नभ,जल,थल इनसे हिलता,
ये अमर वीर बलिदानी।
ऐ! मेरे वतन के लोगों,
जरा याद करो कुर्बानी,
फिर आया सेना दिवस ये,
है कोई न इसका सानी।
ऐ! मेरे वतन के लोगों…

कोई नभ में आग उगलता,
ये छाती अपनी अड़ाते।
गोली लगने से पहले,
दुश्मन को धूल चटाते।
खूनों से नहाती धरती,
है ऐसी इनकी जवानी।
फिर आया सेना दिवस ये,
है कोई न इसका सानी।
ऐ! मेरे वतन के लोगों,
जरा याद करो कुर्बानी।
ऐ! मेरे वतन के लोगों…..

 

रामकेश एम यादव (कवि, साहित्यकार)
( मुंबई )
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