Kahani Bhooton ka Agent

शैतान | Shaitan

क्या सच में, होते हैं शैतान ?

क्या सच में,
होते हैं शैतान ?
या ये है केवल,
हमारा अनुमान ।
हां वाकई,
होते हैं शैतान ।
जब हम करते हैं,
कोई बुरा काम ।
या फ़िर करते हैं,
बड़ों का अपमान ।
तब हमारे भीतर ही,
प्रविष्ट हो जाते हैं ;
ये दुष्ट शैतान ।
जब हम, भूल जाते हैं ,
सही ग़लत की पहचान ।
तभी हमें उकसाते हैं ,
ये हमारे भीतर के शैतान ।
जब भी हमें होता है,
अपनी सफलता का अभिमान ।
ये ही भर देते हैं,
हमारे अंतस में गुमान ।
जब कभी, हम परिवार में ।
लेते दिमाग से काम ।
बस उसी क्षण ,
दिखाई देते ;
हमें हमारे अंदर के शैतान !
हां हमारे भीतर ही,
निवास करते ये शैतान !

Pragati Dutt

श्रीमती प्रगति दत्त
अलीगढ़ उत्तर प्रदेश

यह भी पढ़ें :

Similar Posts

  • श्री गुरु नानक देव जी | Guru Nanak par kavita

    श्री गुरु नानक देव जी ( Shri Guru Nanak Dev Ji )    प्रथम गुरुवर आप है गुरु नानक सिख समुदाय, सभी की ज़ुबान पर आपका नाम पहला आय। वाहेगुरु जी का खालसा वाहेगुरु जी की फतेह, बिना गुरु के मंजिल तक कोई पहुॅंच नही पाय।।   कल्याणचन्द पिता थें जिनके व तृप्ता थी माता,…

  • शादी की सालगिरह | Shaadi ki Salgirah par Kavita

    शादी की सालगिरह ( Shaadi ki salgirah )    आज हमारी है साथियों वो शादी की सालगिरह, जोड़ी सलामत रहें हमारी दुआएं देना इस तरह। कभी ना उतरे हम दोनों का चढ़ा प्रेम का बुखार, खुशियों का यह सांसारिक मिलन रहें इस तरह।। ग़म का साया कभी न आएं खुशियों बीच हमारे, हर दिन नई…

  • पापा की यादें | Papa ki Yaadein

    पापा की यादें ( Papa ki Yaadein )    पूछ रहे थे तुम मुझसे आंखें क्यों भर आई है गूथ रही थी आटा में बस यू ही कहा था मैंने याद पिता की आई है बरबस ही बरस पड़ी ये अश्रु की जल धारा बनके सावन के इस मौसम में मन ने बातें दोहराई है…

  • मतदान जरूर करें

    मतदान जरूर करें ***** लोकतंत्र के महापर्व का मजा ले लो भैया, नियत तिथि को मतदान कर चुनो भविष्य भैया। अपनी ताकत-एकजुटता का दिखलाओ एहसास, जो काम न करे, कहें उसे नो बाॅस! अच्छे उम्मीदवार को कुर्सी पर बिठाएं, गर ना हो पसंद ‘नोटा विकल्प’ दबाएं। जांच परख कर किसी को दीजिए अपना मत, लालच…

  • मैं और मेरी तनहाई | Main aur Meri Tanhai

    मैं और मेरी तनहाई ( Main aur Meri Tanhai )   मिलने को तो मिला बहुत, पर मनचाहा न मिला। निद्रालस नयनों को सपनों ने है बहुत छला। बनते मिटते रहे चित्र कितने ही साधों के। दण्ड भोगता रहा न जाने किन अपराधों के, साॅसों की पूंजी कितनी ही, मैंने व्यर्थ गंवाई। बहुत बार भयभीत…

  • धरा | Dhara par Kavita

    धरा ( Dhara )    धरा मुस्कुराई गगन मुस्कुराया खिल गए चेहरे चमन महकाया रंगों से रोशन हुई ये अवनी सारी धरती पे खुशियों का मौसम छाया खेतों में सरसों लहराई पीली ओढ़ ली धरा ने चुनरिया रंगीली महका मधुमास मदमाता आया मस्ती में झूमे समां हरसाया गुलशन सारे लगे फिर महकने प्रेम के मोती…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *