घटा घनघोर घन घन बरसे,दामिनी तडके है तड तड। धरा की प्यास मिटती, तन मे जगती प्यास है हर पल।

शकुन्तला | Shakuntala kavita

शकुन्तला

( Shakuntala kavita )

 

घटा घनघोर घन घन बरसे,दामिनी तडके है तड तड।
धरा की प्यास मिटती, तन मे जगती प्यास है हर पल।

 

मिले दो नयन नयनो से, मचल कर कामना भडके।
लगे आरण्य उपवन सा,अनंग ने छल लिया जैसे।

 

भींगते वस्त्र यौवन से लिपट कर, रागवृंत दमके।
रति सी भावना मचले, शकुन्तला रूप यौवन से।

 

कली कचनार सी, गजगामिनी जड सी खडी रहकर।
लरजते कांपते अधरों से, षोडषी देखती थमकर।

 

श्वास गति तीव्र होकर के, तपन तन की बढाते थे।
खडे दुष्यंत मन्मथ मनसिजा, रविकान्त प्यारे से।

 

प्रणय की भावना भडकी,रूकी फिर न मदन बरसी।
लिया गन्धर्व साक्षी काम तन की, पुष्पधंव रति सी।

 

मिले जब मन वदन की प्यास, बादल रूक गए गिर के।
धरा सी शान्त होकर के शकुन्तला, देखती लज के।

 

मिलन था शक्ति का शिव से, चराचर सत्य सृष्टि का।
नही हुंकार था इसमें , प्रणय यह शेर दृष्टि का।

 

✍?

कवि :  शेर सिंह हुंकार

देवरिया ( उत्तर प्रदेश )

??
शेर सिंह हुंकार जी की आवाज़ में ये कविता सुनने के लिए ऊपर के लिंक को क्लिक करे

यह भी पढ़ें : –

शान्तिपर्व | Shanti parva kavita

Similar Posts

  • जीवन की रफ्तार है बेटी | Jeevan ki Raftaar Hai Beti

    जीवन की रफ्तार है बेटी ( Jeevan ki Raftaar Hai Beti ) बाबा के बीमार मन काउपचार ..माँ के दिल की धड़कनजीवन की रफ्तार है बेटीजीवन की रफ्तार है बेटीशांत समंदर हैसमय पड़ने परम्यान से निकलती हुई तलवार है बेटीरानी दुर्गावती ,पद्मावती , लक्ष्मीबाई का स्वप्न साकार हैं बेटी..कलम की आवाज हैसाहित्यकार, कलमकार, अभिनेता राजनेता…

  • बचपन आंगन में खेला | Kavita bachpan aangan mein khela

    बचपन आंगन में खेला ( Bachpan aangan mein khela )   नन्हे नन्हे पाँवों से जब,बचपन आँगन में खेला। मेरे घर फिर से लगता है,गुड्डे गुड़ियों का मेला।। खाली शीशी और ढक्कन में, पकवान भी खूब सजें डिब्बों पीपों में लकड़ी संग, रोज ढोल भी खूब बजें खिड़की के पीछे जा जाकर, टेर लगाना छिप…

  • तुम मिले | Tum Mile

    तुम मिले… सब कुछ मिल गया ( Tum mile sab kuch mil gaya )    तुम मिले बहारें आई समझो सब मिल गया। चेहरों पे रौनक छाई खुशियों से खिल गया। दिल को करार आया लबों पे प्यार आया। मौसम दीवाना हुआ मन ये मेरा हरसाया। प्रेम के तराने उमड़े हृदय प्रीत की घटाएं छाई।…

  • अंतर्मन | Antarman

    अंतर्मन ( Antarman )   टूट भी जाए अगर, तो जुड़ जाती है डोर एक गांठ ही है जो कभी, खत्म नहीं होती मन की मैल तो होती है, दबी चिंगारी जैसे जलने भी नही देती, बुझने भी नही देती रोता है अंतर्मन, मुस्कान तो सिर्फ बहाना है मजबूरी है जिंदा रहना, यही अब जमाना…

  • राहत की आहट | Rahat ki Aahat

    राहत की आहट ( Rahat ki Aahat ) तेरी यादों के साए में जब भी, मैं खो जाता हूँ, अंधेरों में भी कहीं तेरा चेहरा देख पाता हूँ। जुदाई के ग़म में ये दिल रोता है तन्हा, पर राहत की आहट से मैं फिर से जी जाता हूँ। तेरे आने की उम्मीद अब भी बरकरार…

  • नन्हे कन्हैया | Nanhe Kanhaiya

    नन्हे कन्हैया ( Nanhe Kanhaiya ) यशोदा के लला नंद बाबा के प्यारे नन्हे कन्हैया छोटी दंतिया दिखाएं पग घुंघरू बांध इत उत डोले प्यारी प्यारी मुरली की तान सुनाएं मोर पंख मस्तक पर सुंदर सजाएं दूध दही संभालो मटकी फोड़न को आए कदंब के झूलों में वृंदावन की गलियों में आए कन्हैया को ढूंढने…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *