Sher ke kuch shabd

कुछ शब्द शेर के | Sher ke kuch shabd

कुछ शब्द शेर के

( Kuchh shabd sher ke )

…….
मुसाफिर तंन्हा हूँ मै, साथ चलोगे क्या, तुम मेेरे।
है मंजिल दूर, सफर मुश्किल , क्या साथ चलोगे मेरे।
यही है डगर, एक मंजिल है तो फिर, साथ चलो ना,
सफर कट जायेगा दोनो का, हमसफर बनोगे मेरे।
……
करेगे दुख सुख की बातें, बातों से खनक बढेगी।
हमारे दिल से तेरे दिल की भी, कुछ ललक बढेगी।
ना सोचो तंन्हा हो तो, बात करे हम दिल से दिल की,
हमारे बातों से लोगो की भी कुछ धडक बढेगी।
……
शेर के शब्द सुनो तो, रस्ता यू ही कट जायेगा।
चलेगे साथ अगर तो मंजिल, पास नजर आयेगा।
टटोलो दिल को अपने साथ शेर के चलना है क्या,
तुम्हारे दिल के दरवाजे पे , शेर नजर आयेगा ।
…….

??

उपरोक्त कविता सुनने के लिए ऊपर के लिंक को क्लिक करे

✍?

कवि :  शेर सिंह हुंकार

देवरिया ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें : –

शेर की कविताएं | Kavitayen Sher Ki

 

Similar Posts

  • जनक सुता जानकी | Janak Suta Janaki

    जनक सुता जानकी ( Janak Suta Janaki )    जनक सुता जगजननी जानकी राधव प्रिया सिया अंबे मात की अष्ट सिद्धि नवनिधि सब दाता पवन पुत्र मां सिया गुण गाता रघुनंदन श्रीराम प्रिय स्वामी सारे जग के ईश्वर अंतर्यामी अवधपुरी हो आप महारानी लव-कुश बालक महाज्ञानी पतिव्रता प्रभुता बल नारी अग्नि परीक्षा तप बलधारी लक्ष्मी…

  • धन्य कब होंगे नयन अधीर | Nayan Adheer

    धन्य कब होंगे नयन अधीर ! ( Dhanya kab honge nayan adheer )    न आये देव दीन के द्वार। तृषित उर को दे सका न तोष, तुम्हारा करुणा पारावार। न आये देव दीन के द्वार। निराशा का न हुआ अवसान, हुई आशायें प्रतिपल क्षीण। भग्न होते जाते स्वर तार, करुण क्रन्दन करती हृदवीण। प्रतीक्षा…

  • रंग | Daisy Chain Poem in Hindi

    रंग ( Rang )    विधा: डेजी चैन   रंग रंगीला फागुन आया आया मधुमास महकता महकता रहा चमन सारा सारा समां झूमा खुशियां पा पा लेना मुस्कानों के मोती मोती से शब्द अनमोल अनमोल है बड़ों का प्यार प्यार भरे दो बोल मीठे मीठे मीठे रसीले गाल गोरी तेरे तेरे संग खेलूं सजनी होली…

  • जज्बात | Jazbaat poetry

    जज्बात ( Jazbaat )   मचलते दिल में कुछ अरमान मेरे, जग रही ही अब। दबा था दिल जो वो प्यास शायद, जग रही ही अब।   तरन्नुम में कहु तो, हाल ए दिल बेचैन है दिलवर, तुम्ही पे मर मिटू हुंकार ये चाहत, जग रही है अब।   ये रातें नाग बनकर डंस रही…

  • समय का कालखंड | Kavita Samay ka Kalkhand

    समय का कालखंड ( Samay ka kalkhand )   समय की महत्ता जो समझे वही  है  बलवान, समय के संग चलनेवाला होता  है  धनवान। सु अवसर  पाकर जो कर्म से मुकर जाता है, वह अभागा है धरती पर जीवन भर पछताता है। समय ही करावत लड़ाई-झगड़ा बनावत राजा रंक फकीर, समय ही बनाता-बिगाड़ता रिश्ता और…

  • स्वतंत्रता

    स्वतंत्रता   नभ धरातल रसातल में ढूंढ़ता। कहां हो मेरी प्रिये  स्वतंत्रता।। सृष्टि से पहले भी सृष्टि रही होगी, तभी तो ये बात सारी कहीं होगी, क्रम के आगे नया क्रम फिर आता है, दास्तां की डोर बांध जाता है।। सालती अन्तस अनिर्वचनीयता।।                        …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *