ज्ञान का दीप जलाते शिक्षक | Shikshak ke Upar Kavita

ज्ञान का दीप जलाते शिक्षक

( GYan ka deep jalate shikshak ) 

 

उनकी महिमा का वर्णन मैं कैसे करूं,
ज्ञान की रोशनी जिनसे मुझको मिली,
जब कभी लड़खड़ाएं है मेरे कदम,
सीख से उनकी हिम्मत है मुझको मिली ।

अपने ज्ञान की पावन गंगा से,
सबको शीतल कर देते शिक्षक।
जीवन की अंधेरी राहों में,
ज्ञान का दीप जलाते शिक्षक।

मुश्किल चाहें कितनी आए,
सही राह दिखलाते शिक्षक।
दुविधा के बादल छा जाएं,
तो सरल हवा बन जाते शिक्षक ।

मुझ जैसे अज्ञानी के मन में,
ज्ञान की अलख जगाई है।
यह समझ उन्हीं की दी है हुई,
जो मैने उनकी महिमा गाई है।

 

रूबी चेतन शुक्ला
अलीगंज ( लखनऊ )

यह भी पढ़ें :-

बेटी उर्फ नारी | Beti urf Nari

 

Similar Posts

  • जटायु राज | Kavita

    जटायु राज ( Jatayu raj )   रावण मारीच को संग ले पंचवटी में जाता है मायावी बाबाजी बनकर सीता हर के लाता है   कोई प्राण बचा लो मेरे मेरी करूण पुकार सुनो आकर रक्षा करो हमारी धरा गगन जहान सुनो   स्वर सुन सीता माता का पक्षी राज जटायु आया रे दुष्ट क्या…

  • माँ के साथ | Maa ke Sath

    माँ के साथ ( Maa ke sath )    देख लो ढूंढ लो कोई दिख जाए तो दिखा देना, इक माँ जैसा कोई दूजा मिल जाए तो बता देना! नहीं चाह रखती है कभी माँ हमारे पैसों की, हो सके तो थोड़ा समय माँ के साथ बिता देना। मैं जानता हूँ भाई बहुत ही बिजी…

  • शक | Hindi Poem Shak

    शक ( Shak )   बिना पुख़्ता प्रमाण के शक बिगाड़ देता है संबंधों को जरा सी हुई गलतफहमी कर देती है अलग अपनों को काना फुसी के आम है चर्चे तोड़ने में होते नहीं कुछ खर्चे देखते हैं लोग तमाशा घर का बिखर जाता है परिवार प्रेम का ईर्ष्या में अपने भी हो जाते…

  • यादें | Kavita

    यादें ( Yaaden ) जाती है तो जाने दों,यह कह नही पाया। नयनों के बाँध तोड़ के, मैं रो नही पाया। वर्षो गुजर गए मगर, तू याद है मुझको, मै भूल गया तुमको, ये कह नही पाया।   दिल का गुबार निकला तो,शब्दों में जड दिया। तुम जैसी थी इस दिल में तुझे,वैसा गढ़ दिया।…

  • मेरा अस्तित्व | Kavita Mera Astitva

    मेरा अस्तित्व ( Mera Astitva ) क्या मेरे अस्तित्व के कोई मायने रहेंगे ? अगर मैं उतार भी दूं चेहरे पर से चेहरा मेरे स्वयं का अस्तित्व ही पिघल जायेगा और—- मैं अनाम हो जाऊँगी तेज झंझावतों में उठे धूलकणों की तरह हो चुका होगा जर्जर मेरा अंग-प्रत्यंग मेरा वर्ण धीमा हो जायेगा चेहरा, चेहरा…

  • समय का कालखंड | Kavita Samay ka Kalkhand

    समय का कालखंड ( Samay ka kalkhand )   समय की महत्ता जो समझे वही  है  बलवान, समय के संग चलनेवाला होता  है  धनवान। सु अवसर  पाकर जो कर्म से मुकर जाता है, वह अभागा है धरती पर जीवन भर पछताता है। समय ही करावत लड़ाई-झगड़ा बनावत राजा रंक फकीर, समय ही बनाता-बिगाड़ता रिश्ता और…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *