श्रीराम प्राण प्रतिष्ठा विशेष

श्रीराम प्राण प्रतिष्ठा विशेष

 

महलों में रहने वाला वन में रहा,
बीते बरसो तक जंगलों में गुमनाम रहा,
खत्म हुई इंतजार की घड़ियां,
आज घर घर बस एक ही नाम गूंज रहा,
हर मां आज कौशल्या बनी,
हर भाई आज भरत सा राह तक रहा,
जगमग सारा आज जग हुआ,
हर शहर आज अयोध्या सा सज रहा,
लौट आए आज सबके प्रभु,
नर नारी संग आज अर्धनारीश्वर भी इतंजार कर रहा,
हर शहर,हर गांव भी भक्ति में डूबा है,
अयोध्या में ही नहीं बल्कि
हर किसी के घर भी आज उनका श्रीराम आ रहा।।

आर.वी.टीना
बीकानेर ( राजस्थान )

यह भी पढ़ें:-

मैली चादर | Maili Chadar

Similar Posts

  • चूडियाँ | Kavita choodiyaan

     चूडियाँ  ( Choodiyaan )   सोलह श्रंगारों मे “चूडी” || 1.चाँद सा गोल आकार, कुछ बड़ी कुछ छोटी सी | रंगीन कुछ सतरंगी सी, कुछ पतली कुछ मोटी सी | सोने पीतल और चाँदी की, कुन्दन काँच मोती की | हांथो मे बजती खन-खन, कलाई सजाती गोरी की | सोलह श्रंगारों मे “चूडी” || 2.लाल…

  • चंद्रयान-३ | Chandrayaan-3

    चंद्रयान-३ ( Chandrayaan-3) ( 1 )  नया द्वार खोलेगा चंद्रयान देखो, बनेगा भारत की पहचान देखो। मुट्ठी में मेरे रहेगा अब चंदा, बढ़ेगा जगत में मेरा सम्मान देखो। कठिन दौर से मेरे गुजरे वैज्ञानिक, उनके भी चेहरों पे मुस्कान देखो। ख्वाहिशें हमारी सदा से हैं जिन्दा, उनके अंदर का अभिमान देखो। स्वागत करो रोली,तंदुल, श्रीफल…

  • चला जायेगा साल तेईस | Chala Jayega 2023

    चला जायेगा साल तेईस ( Chala Jayega 2023 )    चला जायेगा साल तेईस आ गया है दिसंबर दो बातें याद है मुझे एक आपकी शक्ल एक आपका नम्बर चला जायेगा साल तेईस कुछ नहीं हुआ ऐसे बीता जैसे और बीतते थे एक बदलाव आया है मुझे बाप जैसा दोस्त खोया है रविन्द्र गासो चला…

  • तेरे शहर की हवाएँ | Tere shahar ki hawayein kavita

    तेरे शहर की हवाएँ ( Tere shahar ki hawayein )     तेरे शहर की हवा बड़ी सर्द थी उस पर तेरा ख़य्याल तेरे ख़य्याल से  मेरा दिल बेताब सा पर कुछ मलाल   तुझे सीने से लगाने का सबब उफ्फ तेरी गर्म साँसे क्या ख्वाहिशें थी कि उफ्फ रूह का खो गया होश  …

  • पुष्प | Pushp

    पुष्प ( Pushp )   टूट के डाल से जुदा हो गया फूल तो अपना नूर खो गया मुरझाया मगर खुशबू दे गया बिन कहे बहुत कुछ कह गया जिंदगी बस यूं ही तमाम होगी मुस्कुराया अलविदा हो गया नाम था अब बेनाम हो गया काम का अब बेकाम हो गया नियति का उसे भान…

  • जब भी कोई काम करो | Kavita jab bhi koi kaam karo

    जब भी कोई काम करो ( Jab bhi koi kaam karo )   जब भी कोई काम करो कोई मुझे देख रहा है यही सोचकर करो दिल पर जरा हाथ रखो उसने सही कहा तभी करो नफरतों कि आंधियों में झूठा दोष किसी को ना दो ईमान से इनाम के हकदार तुम बन जाते हो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *