Shri Krishna chhand

श्रीकृष्ण | Shri Krishna chhand

श्रीकृष्ण

( Shri Krishna )

 

मनहरण घनाक्षरी

 

माधव मुरली वाले,
गोकुल के घनश्याम।
नंदलाल गिरधारी,
लीलायें रचाइये।

 

यशोदा के राजदुलारे,
जन जन के सहारे।
चक्र सुदर्शन धारी,
मुरली बजाइए।

 

राधा के मोहन प्यारे,
जग के तारणहारे।
जय हो तेरी केशव,
विपद निवारिये।

 

सखा सुदामा हे कृष्णा,
करुणासागर कान्हा।
भक्तों के कष्ट हरने,
दौड़े-दौड़े आइए।

 

?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :- 

जीवन रंग उत्सव | Chhand Jeevan Rang Utsav

Similar Posts

  • स्कूल चले हम | School chale hum | Chhand

    स्कूल चले हम ( School chale hum )   मनहरण घनाक्षरी   आओ स्कूल चले हम, होकर तैयार चले। पढ़ने को लेकर बस्ता, पाठशाला जा रहे।   खुल गई स्कूले सारी, मोटी मोटी फीस भारी। कापी किताबें लेकर, पढ़ने को जा रहे।   समय पर जगना, समय पर ही सोना। पहन ड्रेस हम भी, विद्यालय…

  • दिल का बहकना | Dil ka bahakna | Chhand

    दिल का बहकना ( Dil ka bahakna )   मनहरण घनाक्षरी   दिलकश हो नजारे, कोई हमको पुकारे। लगे स्वर्ग से सुंदर, महकती वादियां।   दिल दीवाना हो जाए, दिल कहीं पे खो जाए। प्रीत के तराने गाये, मन भाये शादियां।   झूम उठे तार सारे, बोल मीठे प्यारे प्यारे। दिल की धड़कनों में, बज…

  • धीरज | मनहरण घनाक्षरी छंद

    धीरज ( Dheeraj )   नर धीरज धारिये, संयम धरे विचार। धीरे-धीरे बढ़ चलो, ध्वज लहराइये।   धैर्यपूर्वक जो चले, शील गुणी जन जान। धीरे-धीरे मुखर हो, पहचान पाइए।   धीर अमोध अस्त्र है, मृदु वाणी सुरज्ञान। सुर लय तान बन, गीत मीत गाइए।   रणबीर बलवीर, समर न धरो धीर। राष्ट्रहित रणभूमि, वीरता दिखाइए।…

  • जीवन रंग उत्सव | Chhand Jeevan Rang Utsav

    जीवन रंग उत्सव ( Jeevan rang utsav ) सुख दुख आते जाते, पल पल ये मुस्काते। जीवन के रंग बहते, डुबकी लगाइए। कभी ख़ुशी कभी ग़म, जैसे बदले मौसम। पतझड़ बहारों में, आनंद उठाइए। मुस्कानों के मोती बांटे, बोल मीठे प्यार भरे। हिलमिल जिंदगी को, सुख से बताइए। कुदरत रंग भाये, चमन में बहार में।…

  • भक्त प्रह्लाद | Bhakt Prahlad

    भक्त प्रह्लाद ( Bhakt prahlad )     होलिका भी जल गई, प्रह्लाद को भर गोद, हर्ष जग में छा गया, सब होली मनाइए।   सद्भाव की घटाएं भी, लाई रंगों की बहार, घट घट हर्ष छाया, मस्त होकर गाइए।   सच्चे भक्त प्रह्लाद जो, प्रभु का करते ध्यान, दीनानाथ रक्षा करें, हरि ध्यान लगाइए।…

  • दान और दक्षिणा | Chhand daan aur dakshina

    दान और दक्षिणा ( Daan aur dakshina )   मनहरण घनाक्षरी     दान दीजिए पात्र को, दक्षिणा विप्र जो होय। रक्तदान महादान, जीवन बचाइए।   पात्र सुपात्र को देख, दान जरूर कीजिए। अन्नदान सर्वोत्तम, भोजन खिलाइए।   अनुष्ठान करे कोई, जप तप पूजा-पाठ। ब्राह्मण भोजन करा, दक्षिणा दिलाइए।   तुलादान छायादान, कर सको कन्यादान।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *