Shri ram ji ki kavita

राम | Shri ram ji ki kavita

राम

( Ram )

 

१.

रघुपति राघव रघुनाथ राम,भव भंजक प्रभु लीला ललाम
आदर्शों के अवतार तुम्हें ,भारत की संस्कृति के प्रणाम!

२.

हे सर्वश्रेष्ठ मानव स्वरूप , तुम हर युग के इतिहास नवल
जग में कोने कोने फैले , तुमसे जीवन विश्वास धवल!

३.

यह एक शब्द का “राम” नाम,है जीवन का आधार परम
इस का पावन मंत्रोच्चारण , कर देता दूर सभी‌ विभ्रम!

४.

अनुपम जीवन मीमांसा है, यह राम नाम की महा कथा
सारे रस रंग समाहित कर, बिखरी है अदभुत पावनता!

५.

अवधेश राम की गाथा को, कोई भी अनुभव कर सकता
आदर्शों के अनुकरणों से,जीवन को सार्थक कर सकता!

६.

जीवन के आदि जन्म से ले , बचपन, कैशोर्य, युवावस्था
गरिमा पूरित कर्त्तव्य सहज, निर्भय निर्णय की सुदृढ़ता!

७.

मन के दयार्द्र आग्रह कैसे , बनते जीवन संकल्प धीर
सदभाव पूर्ण सन्मार्ग स्वयम , पा लेते हैं अक्षय तूणीर!

८.

परिवार,भ्रातृ संबंध और, गुरु, गुरुकुल, शिक्षा तन्मयता
चातुर्दिक रहते जीवन पर, निर्भर हो कर भी निर्भयता!

९.

इस राम – कथा में सीता हैं, जीवन्त सौख्य संबंध रूप
नारी की महिमा गरिमा के, सब भावों की प्रेरक अनूप!

१०.

जीवन की चलती यात्रा मे, हर सत्य, नीति पालन दृढ़ता
संकल्प,त्याग के साथ साथ,आत्माभिमान की दुर्धर्षता!

११.

वह मातपिता से संबंधों,को समझ मान कर अमल त्याग
रखना वैभव संपत्ति राज्य, हार्दिक स्नेहों से भी विराग!

१२.

रह स्वयं अकिंचन भी दीनों, के लिए सजल स्नेह प्यार
सीमा से भी आगे जाकर, करना उनका मन से दुलार!

१३.

अपनी पीड़ा से बहुतअधिक,अपनों की पीड़ा केअनुभव
सामर्थ्य विनय सेआभूषित,वह क्षमतां जो करदे विप्लव!

१४.

अस्मिता सदा वह परम तत्व,जीवन से ज्यादा मूल्यवान
जो इसकी रक्षा कर सकता, वह ही होता जग में महान!

१५.

अपनी नैतिकताऔर धर्म, की रक्षा हित संघर्ष कठिन.
पर इसमें भी मर्यादा का, निर्वाह सजग रखनाअनुदिन!

१६.

प्रत्यक्ष राम से ही होते, बल बुद्धि जलधि बजरंग बली
कलयुग में जीवितआदिदेव,जिनकी तुलनाऍं नहीं मिली!

१७.

क्या भक्तऔर सेवक प्रभु से,भी हो सकते हैं कहींअधिक
जग में इसकेअनुपम प्रमाण, हनुमान बने हैं सर्वाधिक!

१८.

शत्रुता शत्रु से हो लेकिन, मन में करुणा भी धारित हो
जो भी संघर्ष किया जाये, वह नीति धर्म आधारित हो!

१९.

दुर्गम दुर्धर्ष शत्रु हो यदि, रावण जैसा त्रैलोक जीत
उसकेआगे भी स्वाभिमान,सम्मान परम जीवन सुनीति!

२०.

पा विजय न मन हो मदोन्मत्त,पर वैभव तृण भी ना चाहे
अपने वचनों संबंधों को , सम्यक निष्ठा से निर्वाहे!

२१.

धार्मिक नैतिक मर्यादामय‌,यश वैभव से पूरित समाज
जन मत,जन सुख,मर्यादा का,आदर्शआचरण रामराज!

२२.

धोबी टीका पर सीता का,जाकर वनवासित हो जाना
जग में इस जैसा उदाहरण, है पूर्ण असंभव पा पाना!

२३.

यह कथा राम का हरअवसर, करती आदर्श उजागर है
जिनके पालन से राम जगत, में बनते रूप परात्पर हैं!

२४.

वे बनजाते अवतार परम,जो ऋषिमुनि ध्याते भाव सहित
भारत केआत्मिक चेतन के,सबभाव उन्हीं परआधारित।

?

Manohar Chube

कवि : मनोहर चौबे “आकाश”

19 / A पावन भूमि ,
शक्ति नगर , जबलपुर .
482 001

( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

बीज नियत करता है | Ghazal

Similar Posts

  • छेंड़ कर | Kavita Chhed Kar

    छेंड़ कर ( Chhed Kar ) छेंड़ कर इस तरह न सताया करो, रूठ जाऊॅ अगर तो मनाया करो, दिल मेरा तेरी यादों की है इक गली, याद बनकर कभी इनमे आया करो। गीत कारों ने नज्में लिखे हैं बहुत, गीत मेरे लिए भी कोई गाया करो, इस तरह से मेरी कट पाएगी नहीं, दर्दे…

  • मकर संक्रांति का आगमन

    मकर संक्रांति का आगमन पूस माह कीठंडी ठिठुरती रातेंऔर मकर संक्रांति काआगमन,लोहड़ी, बिहू, उगादि, पोंगलदेते दस्तक दरवाजों पर,मन प्रसन्न हो उत्सवके जश्न में जुट जाता,समझा जातातिल, गुड़, खिचड़ी,दान- धर्म – पुण्यके महत्व को।छोड़ सूर्यदेव दक्षिणायन को,प्रस्थित होते उत्तरायण में।थमें हुए समस्त शुभ-कार्यप्रारम्भ होतेइस दिन से।इसी दिन त्यागी देह,भीष्म पितामह ने,माँ यशोदा नेव्रत अनुष्ठान किया।माँ गंगा…

  • मिलन की चाह | Chhand milan ki chah

    मिलन की चाह ( Milan ki chah )   मनमीत आओ मेरे, मिलन की घड़ी आई। चाहत की शुभवेला, दौड़े चले आइए।   मौसम सुहाना आया, रूत ने ली अंगड़ाई। मिलन को प्रियतम, प्रेम गीत गाइए।   खुशबू ने डाला डेरा, महका दिल हमारा। लबों पे तराने प्यारे, मधुर सुनाइए।   दिल में उमंगे छाई,…

  • बदली का स्वैग | Badli ka Swag

    बदली का स्वैग ( Badli ka swag )    हवा के परों पर उड़ती हुई सी आई एक बदली- छोड़ सारे राग-रोग जम -ठहर गई रमा के जोग। आंँखों में है आकाश कर में बूँदों का पाश छलकेगी- बरसेगी देगी आज जीवन औ धरा को सांँस- इस उन्मत्त बदली को शायद है पता- उसके यूँ…

  • संक्रांति | Sankranti kavita

    संक्रांति ( Sankranti )     उत्तरायण भी कहे सूर्य मकर राशि में पर्व मकर संक्रांति दिवस दान पुण्य का   तिल गुड़ बांट बांट बोले मीठा मीठा बोल पुण्य भरा काज करो शुभ दिवस आज का   पूजा वंदना कर लो तीर्थों का फल मिलता आशीष मात-पिता का वरदान उन्नति का   पावन गंगा…

  • फेसबुक | Facebook par Kavita

    फेसबुक ( Facebook ) फेसबुक ,सामाजिक संवाद का अवतार वर्तमान समय प्रौद्योगिकी, मनुज जीवन अभिन्न अंग । भौगोलिक सीमाएं विलोपित, वसुधैव कुटुंबकम् मंत्र संग । मार्क जुकरबर्ग परम योगदान, श्री गणेश बेला दो हजार चार । फेसबुक, सामाजिक संवाद का अवतार ।। अभिव्यक्ति प्रस्तुति अनंत अवसर, लेख कहानी कविता माध्य । वीडियो रील अनूप युक्ति,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *