श्रोताओं का आनंद

श्रोताओं का आनंद | Kavita Shrotaon ka Anand

श्रोताओं का आनंद

( Shrotaon ka Anand )

बहुत कुछ मैंने अपने
गीतों कविताओं में लिखा।
जिनके हर शब्दो में
प्यार बहुत झालाकता है।
इसलिए तो परिवर्तन की
लहर चल रही है।
और लोगों की देखो
सोच कैसे बदल रही है।।

मेरे ही शब्द अब मुझको
बहुत ही चुभ रहे है।
पर दुनिया के लोगों को
बहुत ही अच्छे लग रहे।
जिनके लिए मैं लिखता हूँ
वो ही मुझसे रूठ गये।
इसलिए मेरी लेखनी में अब
मोहब्बत लुप्त हो रही है।।

किसी का किसी से
संबंध हो जाये।
जीवन का मानों आज
उनसे बंधन हो जाये।
और गीत गजल का
मिलन मंच पर हो जाये।
तो श्रोताओं की रात का
आनंद दूगना हो जायेगा।।

Sanjay Jain Bina

जय जिनेंद्र
संजय जैन “बीना” मुंबई

यह भी पढ़ें :-

हाल-ए-मोहब्बत | Haal-e-Mohabbat

Similar Posts

  • न जाने क्यूॅं | Na Jane Kyon

    न जाने क्यूॅं? ( Na Jane Kyon )  आज भी जब निकलता हूॅं ब्राह्मणों की गली में तो अनायास ही खड़े हो जाते हैं कान चौकस मुद्रा में और चारों ओर दौड़ती हुईं अपलक आकार में बड़ी हो जाती हैं ऑंखें भौंहें तन जाती हैं फड़कने लगते हैं हाथ-पाॅंव और रगों में चोट-कचोट की मिश्रित…

  • रामलला | Ram Lala

    रामलला  Ram Lala ( 2 )    देता अवध घुमाय मोर सजनवाँ ना, रामलला जी कै करित दर्शनवाँ ना। चलत डहरिया पिराई नहीं गोड़वा, छूट जाई एकदिन देखा हाथी-घोड़वा। पूरा होई जाई अपनों सपनवाँ ना, रामलला जी कै करित दर्शनवाँ ना। देता अवध घुमाय मोर सजनवाँ ना, रामलला जी कै करित दर्शनवाँ ना। सरयू नहाई…

  • श्री मज्जयाचार्य जी का 144 वां प्रयाण दिवस

    श्री मज्जयाचार्य जी का 144 वां प्रयाण दिवस तेरापंथ के गणमाली , महानता के आसन पर आसीन , विनय शिरोमणी , भव्य आत्माओ के भीतर संयम का दीप जलाने वाले , अध्यात्म तत्व वेता , समत्व योग के मूर्तिमान आदर्श श्री मज्जयाचार्य जी के चरणो में मेरा शत्-शत् वन्दन ! आज के इस अवसर पर…

  • आई लव यू | I Love You

    आई लव यू ( I love you )   आई लव यू के मर्म में, अपनत्व अमिय धार प्रेम जप तप लगन , तन मन मुदित भाव । निहार अक्स आकर्षण, जीवन सौम्य शीतल छांव । शब्द अर्थ अभिव्यंजना , हृदय श्रोत मधुरता अपार । आई लव यू के मर्म में,अपनत्व अमिय धार ।। अंतराल…

  • एक ही भूल | Ek hi Bhool

    एक ही भूल आज बरसों बाद तुम्हारा दीदार हुआ,दूरियाँ बनी हुई थी फिर से प्यार हुआ। लबों को तुम्हारे लबों का स्पर्श हुआ,बदन की महक का यूँ एहसास हुआ। ग़र ये ख़्वाब है तो ख़्वाब ही रहने दो,मैं सो रहा हूँ सोया हुआ ही रहने दो । चली क्यों नही जाती हो मेरी बातों से,जिस…

  • उसूल | Usool

    उसूल ( Usool )   हर हर मोड़ पर तुम्हें साथी नहीं मिलेंगे परिचितों के कुनबे में पहचान तुम्हें ही बनानी होगी कुछ के साथ तुम्हें चलना होगा और कुछ को अपने साथ चलाना होगा जन्म से पहले तुम्हें कौन जानता था शुरुआत तुम्ही ने की थी कभी मुस्कराकर कभी रोकर लोग जुड़ते गए तुमसे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *