श्री मज्जयाचार्य जी का 144 वां प्रयाण दिवस

श्री मज्जयाचार्य जी का 144 वां प्रयाण दिवस

तेरापंथ के गणमाली , महानता के आसन पर आसीन , विनय शिरोमणी , भव्य आत्माओ के भीतर संयम का दीप जलाने वाले , अध्यात्म तत्व वेता , समत्व योग के मूर्तिमान आदर्श श्री मज्जयाचार्य जी के चरणो में मेरा शत्-शत् वन्दन ! आज के इस अवसर पर मेरे भाव –

मन में क्यों न विचार करे ?
उथले श्रद्धा जल में कैसे तरे ?
अपने मन को संभाले ।
भव – जल से पार करे ।
जीवन है बहुमूल्य सबेरा ,
क्यों इसमें भरे अंधेरा ?
चैतन्य की लौ जला ले ।
जीवन में प्रकाश भर ले ।
जीवन में रात घिर रही ,
अंधकार के रहे कैसे भरोसे ,
निशा अंधेरी भागे ।
सद्भावना का सागर लहराएं ।
घर छूटा साथी भी बिछुड़े ,
साँसो के सारे सपने टूटे ,
आत्मानुभूति जागे ।
मिट जाएं सारे विचार मैले ।
गतिशील चरण सन्मार्ग पर टिके ,
सत्य मार्ग से विचार न डिगे ,
उत्साह सदैव बढ़ता जाए ।
विपत्तियों के अस्तित्व मिटाए ।
विश्वास के गहरे जल में ,
ले अब हम हमारी नौका ,
आसक्ति से अनाहत हो ।
लग जाए नाव भव – सिन्धु किनारे ।

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)

यह भी पढ़ें :-

गुरु पूर्णिमा व 265 वाँ तेरापंथ स्थापना दिवस

Similar Posts

  • मिलन की चाह | Chhand milan ki chah

    मिलन की चाह ( Milan ki chah )   मनमीत आओ मेरे, मिलन की घड़ी आई। चाहत की शुभवेला, दौड़े चले आइए।   मौसम सुहाना आया, रूत ने ली अंगड़ाई। मिलन को प्रियतम, प्रेम गीत गाइए।   खुशबू ने डाला डेरा, महका दिल हमारा। लबों पे तराने प्यारे, मधुर सुनाइए।   दिल में उमंगे छाई,…

  • हाँ! मैं आसमान से बात करती हूँ

    हाँ! मैं आसमान से बात करती हूँ मैं वो लड़की हूँ —जो अक्सर रात की चुप्पियों मेंखुद से सवाल करती है:क्या मेरा होना बस एक समझौता है?या कोई पुकार है —जो इस सदी के शोर में गुम हो गई? मेरी हथेलियाँ खाली नहीं हैं,इन पर बिखरे हैं अधूरे ख्वाब,जो रोज़ सिले जाते हैंघर की चौखटों…

  • हे गगन के चन्द्रमा | Kavita

    हे गगन के चन्द्रमा ( He gagan ke chandrama )   तुम हो गगन के चन्द्रमा, मै हूँ जँमी की धूल। मुझको तुमसे प्रीत है, जो बन गयी है शूल। तेरे बिन ना कटती राते, दिल से मैं मजबूर, हे गगन के चन्द्रमा, तू आ जा बनके फूल।   रात अरू दिन के मिलन सा,क्षणिक…

  • दीपोत्सव | Deepotsav

    दीपोत्सव ( Deepotsav )    कातिक मास अमावस रैन बिना घर कंत जले कस बाती। खेतन में पसरी बजरी डगरी बहु चोर फिरें दिन राती। गावत गान पिटावट धान कटी उरदी कृषिका पुलकाती। घात किए प्रिय कंत बसे परदेश न भेजत एकहुँ पाती।। चंचल चित्त चलै चहुँ ओर गई बरखा अब शीत समानी। छाछ दही…

  • और क्रंदन

    और क्रंदन     थकित पग में अथक थिरकन  और क्रंदन। आंसुओं का बरसा सावन और क्रंदन।।   हृदय से उस चुभन की आभास अब तक न गयी। सिंधु में गोते लगाये प्यास अब तक न गयी ।।   बढ़ रही जाने क्यूं धड़कन और क्रंदन । थकित बालक समझ मुझको धूल ने धूलित किया…

  • खुशी से झूमता है मन | Man ke geet

    खुशी से झूमता है मन ( Khushi se jhoom ta hai man )    हर्ष का उमड़ पड़ा सावन वादियां महक उठी भावन। प्रीत भरी बूंदे भिगो रही तन खुशी से झूमता है मन। खुशी से झूमता है मन   इठलाती बलखाती लहरें बहती भावों की धारा। दिल की धड़कन गीत गाए मनमीत मिला प्यारा‌…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *