न जाने क्यूॅं | Na Jane Kyon

न जाने क्यूॅं?

( Na Jane Kyon ) 

आज भी जब
निकलता हूॅं ब्राह्मणों की गली में
तो अनायास ही
खड़े हो जाते हैं कान
चौकस मुद्रा में
और चारों ओर दौड़ती हुईं अपलक
आकार में बड़ी हो जाती हैं ऑंखें
भौंहें तन जाती हैं
फड़कने लगते हैं हाथ-पाॅंव
और रगों में
चोट-कचोट की मिश्रित उबाल के साथ
बहने लगता है लहू
धमनियाॅं दहक उठती हैं
न जाने क्यूॅं?..

न जाने क्यूॅं?
रोम-रोम आक्रोशित हो उठता है
जाग उठता है ज्वालामुखी
फूट उठता है लावा
क्रान्ति का स्वर
विद्रोह का बिगुल
मेरे भीतर
ऐसी जगहों से गुजरते हुए
तत्क्षण।

 

नरेन्द्र सोनकर ‘कुमार सोनकरन’
नरैना,रोकड़ी,खाईं,खाईं
यमुनापार,करछना, प्रयागराज ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

ग़ज़लों का मुकम्मल संकलन : ” ज़िंदगी अनुबंध है “

Similar Posts

  • संसार न होता | Kavita Sansar na Hota

    संसार न होता….! ( Sansar na hota )   मन का चाहा यदि मिल जाता, तो फिर यह संसार न होता। हार न होती, जीत न होती, सुख दु:ख का व्यापार न होता। रोग-शोक-संताप न होता, लगा पुण्य से पाप न होता। क्यों छलकाते अश्रु नयन ये, जो उर में परिताप न होता। स्नेह स्वार्थ…

  • किसान | Kisan par Kavita

    किसान! ( Kisaan ) ( 3 ) हर तरफ होता किसान हि किसान है फिर भी किसान हि क्यों बेपहचान है गर्मी हो या ठंडी गुजर रही सब खेतों में हर मौसम में जूझ रहा वही नादान है दाना दाना चुगकर करता जीवन यापन तब हि हर महलों में पहुँच रहा राशन है जीवन प्यासा…

  • करवा का चाँद

    करवा का चाँद करवा का चाँदगगन और आँगन मे तो आयातेरी और मेरी आँखो में कभी आया ही नहींछन्नी के उस पार जाती हुई धुंधली नजर में मैने तुम्हे कैद कभी किया ही नहींतुम कैद कभी हुए नहींकरवा का चाँदगगन और आँगन मे तो आयातेरी और मेरी आँखो में कभी आया नहींआँखो में कभी आया…

  • धरोहर | Dhrohar kavita

     धरोहर  ( Dhrohar :  Kavita )   ->बड़ी सुरक्षित हैं मेरे पास , तेरी धरोहर . . . . ॥ 1 .समेटकर रखी है मैंने , तेरी सारी यादों को ।  ये अक्सर आती हैं,और रूला देती हैं मुझे । नम हो जाती हैं मेरी आँखें , झरने सी बहती हैं । सजाकर रखी हैं…

  • तपन | Tapan

    तपन ( Tapan )    तपन है जैसे तपती रेत मे नंगे पांव की मिली न बसर जिंदगी मे किसी छांव की चलता ही रहा ,फजर से शामेरात तक मिली न सराय कोई ,शहर से गांव तक बच्चों ने कहा ,भविष्य है उनके बच्चों का बेटियों ने कह दिया ,पापा हमे भूल गए अपनों की…

  • हुड़दंग मचा होली में | Holi ke Hurdang par Kavita

    हुड़दंग मचा होली में  ( Hurdang macha Holi mein )    हुड़दंग मचा हैं होली में देखो मस्ती की डोली में मस्त मगन हमजोली में किशोर सारे डोल रहे हैं, भंग चढ़ी हैं इस होली में उड़ रहा है अबीर गुलाल ढोल का अपना सुरताल मचा हुआ, गजब धमाल खुशियों के रंगों से रंगी होली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *