Shrrngaar

श्रृंगार | Shrrngaar

श्रृंगार

( Shrrngaar ) 

 

मधुरम नयन काजल से प्रिय,
अधर पंखुड़ी गुलाब की जैसे ,
लट गुघराली उड़े जब मुख पर
मधुरम मुस्कान को संग लिए
स्त्री अपने लाज भाव से ही
पूर्ण करे अपना श्रृंगार सारा ।।

रूप मोतियों के जैसा प्यारा
कंचन बरण दमके यह कया
हृदय में प्रेम के स्वर सजाकर
गीत सजाए जो वो प्रियवर के
मधुर गुंजन सा होता अनुभव
प्रीत से ही श्रृंगार हो जाए सारा ।।

भाव विभोर कर देती हैं छवि
स्त्री प्रेम से मांग सजाएं अपनी
बिंदिया अमूल्य कहलाई उसकी
कंठ में पहनी प्रीत की माला
पग में पहिनकर नूपुर , पायल
श्रृंगार पूर्ण करती हैं स्त्री सारा ।।

आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर – मध्य प्रदेश

यह भी पढ़ें :-

मेरा सनातन धर्म | Sanatan Dharma

Similar Posts

  • आख़िर क्यों?

    आख़िर क्यों? क्यों हर राह तुझ तक जाती नहीं,क्यों तेरी झलक नज़र आती नहीं?हर रोज़ तुझे देखने की कोशिश की,फिर भी क्यों मेरी दुआ असर लाती नहीं? ना कोई शिकवा, ना कोई गिला है,तेरे बिना हर लम्हा मुझे अधूरा मिला है।मैंने तो बस तुझसे प्यार किया,फिर क्यों मुझे ये फ़ासला मिला? कभी ख्वाबों में, तो…

  • मेरा बचपन | Mera bachpan kavita

    मेरा बचपन ( Mera Bachpan )     वो रह रह कर क्यों याद आता है मुझे वो मेरा बचपन जो शायद भूल मुझे कहीं खो गया है दूर वो मेरा बचपन… वो पापा की बातें मम्मी का झिड़कना इम्तिहान के दिनों में मेरा टीवी देखने को ज़िद करना…. कितना मासूम था भोला था वो…

  • तन के उजले मन के काले | Tan ke Ujle Man ke Kale

    तन के उजले मन के काले ( Tan ke ujle man ke kale )   दुष्चक्रो के जाल फैलाए छल कपट दांव चलाए। भ्रष्टाचारी खुद हो जाए लूट खसोट वो अपनाए। घट में कितने नाग पालते स्वार्थ में रहते मतवाले। कैसे हैं मतलब वाले तन के उजले मन के काले। तन के उजले मन के…

  • होगा निश्चय सबेरा

    होगा निश्चय सबेरा   अधिकार है सबको जीने का राजा रंक और फकीर, तृप्त होता कोई ख़्वाब देखकर हँसकर काटता कोई गम के जंजीर। लाख उलझनें हो जीवन में ख़्वाब सभी सजाते हैं, किसी के ख़्वाब पूरे होते किसी के अधूरे रह जाते हैं। नीद में देखता ख़्वाब कोई कोई सो नही पाता है, न…

  • गुरुवर तो अनमोल है | Guruwar to Anmol Hai

    गुरुवर तो अनमोल है ( Guruwar to Anmol Hai ) दूर तिमिर को जो करे, बांटे सच्चा ज्ञान। मिट्टी को जीवित करे, गुरुवर वो भगवान।। जब रिश्ते हैं टूटते, होते विफल विधान। गुरुवर तब सम्बल बने, होते बड़े महान।। नानक, गौतम, द्रोण सँग, कौटिल्या, संदीप। अपने- अपने दौर के, मानवता के दीप।। चाहत को पंख…

  • खूबी मां की | Maa par Kavita in Hindi

    खूबी मां की ( Khoobi maa ki )   मां तेरे आँचल में, हर पल सलोना देखा है। मार कर मुझे, तुझको रोता मैंने देखा है। डांटना तो बस, तेरा नाराजगी जताने का, प्यारा तरीक़ा है, देती खुशियां ही खुशियां, क्या??? तू कोई फरिश्ता है। Phd करके भी तू, क्या?? गिनती भूल जाती है। मांगता…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *