Shuddhi se Siddhi Tak

शुद्धि से सिद्धि तक | Shuddhi se Siddhi Tak

शुद्धि से सिद्धि तक

( Shuddhi se siddhi tak ) 

 

शुद्धि से सिद्धि तक, विमल जीवन पथ

मानव जीवन अहम ध्येय,
सुख आनंद प्रति क्षण ।
सद्गुण आदर्श सर्व व्याप्त,
सात्विकता रमण अक्षण ।
ऊर्जस्वित कदम अग्रसर,
अर्जन मनुज मनोरथ ।
शुद्धि से सिद्धि तक, विमल जीवन पथ ।।

तन मन स्वस्थ स्वच्छ,
उत्पन्न नैतिक सोच विचार ।
पुलकित भाव तरंगिनी,
जड़ अस्त नैराश्य विकार ।
दया करुणा परहित काज,
कर मानव सेवा शपथ ।
शुद्धि से सिद्धि तक, विमल जीवन पथ ।।

पावनता धारित परिवेश,
नित अथाह खुशियां वृष्टि ।
आदर सत्कार सर्व जन,
प्रेम अपार स्नेहिल दृष्टि ।
हिय स्पर्शन अलौकिकता,
परम दर्शन सदा सरथ ।
शुद्धि से सिद्धि तक, विमल जीवन पथ ।।

असंभवता रूप विलोपन,
संभवताएं अनूप श्रृंगार ।
सहभागी रज रज आभा ,
अनुग्रह अंतर्संबंध आधार ।
जन्म जन्मांतर तिमिर अस्त,
उर ओज आरूढ़ रश्मि रथ ।।
शुद्धि से सिद्धि तक,विमल जीवन पथ ।।

 

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

यह भी पढ़ें :-

विश्व शिक्षक दिवस | Vishva Shikshak Diwas

Similar Posts

  • मेरे श्री राम | kavita mere shri Ram

    मेरे श्री राम ( Mere Shri Ram )   त्याग तपस्या मर्यादा के प्रति पालक मेरे श्रीराम जन जन आराध्य हमारे सृष्टि संचालक प्रभु राम   हर लेते है पीर जगत की दीनबंधु दयानिधि राम मंझधार में अटकी नैया पार लगाते मेरे प्रभु राम   दुष्टों का संहार करें प्रभु सकल चराचर के स्वामी घट…

  • भ्रष्टाचार और दुराचार | Poem on corruption in Hindi

    भ्रष्टाचार और दुराचार ( Bhrashtachar aur durachar )   कष्ट भरी जिंदगी में केवल भरा भ्रष्टाचार हैं भ्रष्टाचारी लोगो के सामने आज भगवान भी लाचार है   किसी के  मन में अब न स्नेह औरप्यार हैं और न किसी के ह्दय में नाहि सतगुण वाला सदाचार है   लेकिन दुनिया को कहाँ पता प्रेम और…

  • नटखट नन्दकिशोर | Natkhat Nandkishor

    नटखट नन्दकिशोर ( Natkhat Nandkishor ) नटखट नन्दकिशोर की दोउ अंखियन पे वारी जाऊं, नटखट नन्दकिशोर की मीठी बतियन से हारी जाऊं, कान का कुंडल मुझको भाऐ, बांसुरिया मेरा चैन चुराऐ, मोह मे उसके फंसती जाऊं, नटखट नन्दकिशोर की दोउ अंखियन पे वारी जाऊं, नटखट नन्दकिशोर की मीठी बतियन से हारी जाऊं, किया जाने कौन…

  • अस्तित्व | Astitv

    अस्तित्व ( Astitv )    समाज ही होने लगे जब संस्कार विहीन तब सभ्यता की बातें रह जाती हैं कल्पना मात्र ही सत्य दब जाता है झूठ के बोझ तले अवरुद्ध हो जाते हैं सफलता के मार्ग चल उठता है सिर्फ दोषा रोपण का क्रम एक दूसरे के प्रति मर जाती है भावनाएं आपसी खत्म…

  • योग

    योग ( दोहा आधार छंदगीत ) श्वास और प्रश्वास से, समता भाव निखार।।योग मिलन है मुक्ति है, योग ही शाश्वत सार। समय निकालो योग का, करिए प्राणायाम।स्वस्थ्य शरीर रहे सदा, चित्त वृत्ति परिणाम।।ध्यान धारणा यम-नियम, आसन प्रत्याहार।योग मिलन है मुक्ति है, योग ही शाश्वत सार। चित्तवृत्ति को साधकर, स्थिर करता योग।आसन विविध प्रकार के, रखते…

  • ऐ सर्द हवा

    ऐ सर्द हवा ऐ सर्द हवा का झोंका,अब तो,शांत हो जा,तू भी कहीं जाकर और आराम से सो जा।। जग को क्यों इतना परेशान कर रहा है,काहे जग के लिए तू शैतान बन रहा है।। बूढ़े, बच्चे सब तो परेशान हो गए हैं,बताओ, आप किसकी सुध में खो गए हैं।। पेड़ पौधे भी तो अब…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *