श्याम रे

Bhakti Kavita | Hindi Kavita | Hindi Poem -श्याम रे

श्याम रे

( Shyam Re )

 

नाही  आये  यमुना  तट पे  श्याम रे,

सुबह  बीती  दोपहरी  हुई  शाम  रे।

 

कहाँ छुप गए मनमोहन घनश्याम रे,

मन  है बेकल  कहाँ  है श्री श्याम रे।

 

निरखत से नयन नीर भर भर आए रे,

जैसे  घटा  में  मेघ घन  घिर  आए रे।

 

कारी  बदरिया  देख  मन  घबराये रे,

राधा निहारे राह श्याम नाही आए रे।

 

जाके  देखो  कहाँ है सखी श्याम रे,

काहे  आए  ना नन्द जी के लाल रे।

 

तोरी   पइया  पडूं  मै  जोरू हाथ रे,

ढूंढ  कर  लाओ जाओ घनश्याम रे।

 

रह  रह  के  हूंक  उठे जिया घबराए रे,

आहट हो कोई लगे श्याम पिया आए रे।

 

“शेर” लिखे   विरह का ऐसा राग रे,

राधारानी   पुकारें   जैसे  श्याम रे।

 

✍?

कवि :  शेर सिंह हुंकार

देवरिया ( उत्तर प्रदेश )

??
शेर सिंह हुंकार जी की आवाज़ में ये कविता सुनने के लिए ऊपर के लिंक को क्लिक करे

यह भी पढ़ें : 

Hindi Kavita On Life | Hindi Kavita -मुसाफिर

Similar Posts

  • राम के नाम पे | Kavita Ram ke naam pe

    राम के नाम पे ( Ram ke naam pe )   राम के नाम पे न कीचड़ उछालो, बिगड़ी हुई तू अपनी बना लो। छोटे- बड़े का अदब जो सिखाया, अमन-ओ-अमन का बीड़ा उठाया। सफर जिन्दगानी सुहानी बना लो, बिगड़ी हुई तू अपनी बना लो। राम के नाम पे न कीचड़ उछालो, बिगड़ी हुई तू…

  • पुष्प की अभिलाषा | Pushp par Kavita

    पुष्प की अभिलाषा ( Pushp ki abhilasha )    मै हूँ एक छोटा सा यह फूल, निकल आता पौधे पर फूल। पहले होता में बाग व बग़ीचे, आज लगाते घर गमले बग़ीचे।। मैं एक फूल अकेला हूँ ऐसा, खिलते तोड़ लिया मुझे जाता। वन माली मुझको पानी है देता, खाद और रखवाली भी करता।। कभी-कभी…

  • बुजुर्ग | Atukant kavita

    बुजुर्ग ( Buzurg ) अतुकांत कविता   अधेड़ सी उम्र सफेद बालों वाले बुजुर्ग जीवन का अनुभव लिए हुए दुनिया का जाने क्या-क्या उतार-चढ़ाव देखे होंगे कितने आंधी और तूफान आए होंगे कितने सावन बरसे पुष्प खिले होंगे मन के किसी कोने में खुशियों की बहारों के कितनी मेहनत संघर्ष किया होगा जीवन में उम्र…

  • ढेरा | Dhera

    ढेरा ( Dhera )    सवालों का ढेरा है बस दुआओं का सहारा है।। मंजिल की राहों में बसेरा है बस वक्त का चेहरा है।। सवालों ने घेरा है जिम्मेदारियों का पहरा है।। ख़्वाब में तो आसमान की उड़ान है खुदकी बनानी पहचान है।। सवाल है दिल में फैला, क्यू चल रहा तू दलदल में…

  • चलो आज आजादी को हम घर ले आए | Poem on independence day in Hindi

    चलो आज आजादी को हम घर ले आए ( Chalo aaj azadi ko hum ghar le aaye )   चलो आज आजादी को हम घर ले आयें !! उसको भावों के चन्दन अक्षत से पूजें स्नेहों के पुष्प माल पहनाएँ !! चलो आज आजादी को हम घर ले आयें !! गत सात दशक से आजादी…

  • पर्यावरण | Paryavaran

    पर्यावरण ( Paryavaran )    विविध जीवों का संरक्षण मान होना चाहिए। स्वस्थ पर्यावरण का संज्ञान होना चाहिए।। प्रकृति साम्यता रहे धरा का भी श्रृंगार हो, वृक्षों की उपयोगिता पर ध्यान बार बार हो। वृक्ष, प्राणवायु फल छाया लकड़ियां दे रहे, उसके बदले में हम उनकी संख्या न्यून कर रहे। ‘दस पुत्र समो द्रुम:’ यह…

2 Comments

Leave a Reply to Roshni Arora "Rashmi" Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *