सितम ढा रही है अदा आपकी ये
सितम ढा रही है अदा आपकी ये

सितम ढा रही है अदा आपकी ये

( Sitam Dha Rahi Hai Ada Aapki Ye )

सितम ढा रही है अदा आपकी ये।
सहे  जा  रहे हैं  खता आपकी ये।।

 

मजा भी बहुत है सजा जो मिली है।
निगाहें है कातिल जुदा आपकी ये।।

 

हो  अब  दूर  कैसे  तेरे गेसुओं से।
हमें नित बुलाती सदा आपकी ये।।

 

घिरा जब भी पाया मुसीबत में खुद को ।
बचाती  है   आई   दुआ   आपकी   ये।।

 

सलामत रहे ये सदा हुस्न तेरा।
अदाएं बचाए खुदा आपकी ये।।

🍁
कवि व शायर: Ⓜ मुनीश कुमार “कुमार”
(हिंदी लैक्चरर )
GSS School ढाठरथ
जींद (हरियाणा)

यह भी पढ़ें : 

Romantic ghazal -लहरा रहा है शान से आंचल जनाब का

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here