Sochna Aapko hai

सोचना आपको है | Sochna Aapko hai

सोचना आपको है

( Sochna aapko hai ) 

 

जानता हूं
तुम गलत नही थे कभी
न ही बैर था किसी से तुम्हारा
गलत रहा तो बस
तुम्हारी सोच का नजरिया
और तुम्हारी संगत….

अपनों पर किए शक
गैरों पर जताया भरोसा
मीठी बोली मै रहा व्यंग छिपा
आंखों मे दबी वासना रही
जल्दबाजी की दौड़ में
ऊंचाई की कामना रही…

आप गलत नही थे
दोस्तों की संगत मे
बहकी हुई भावनाओं ने
तुम्हे कभी ठहरने ही नही दिया…..

स्थिरता मे चाहते तो
ऊंचाइयां कदमों तले थीं
ख्वाहिशों ने ही तुम्हे चढ़ने नही दिया…

वक्त और जवानी
तो है बहता हुआ पानी
बचे शेष मे विशेष न हो भले
किंतु ,शेष तो रहता है कुछ
उसी कुछ के सहारे
कर सकते हो फिर भी बहुत कुछ
अब यह सोचना आपको है की कैसे….

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

चलना सीखे नही | Chalna Sikhe Nahi

Similar Posts

  • विद्यार्थी | Vidyarthi par kavita

    विद्यार्थी ( Vidyarthi )    एक यही होती विद्यार्थियों की पहचान, मंजिल को पाना और बनना है महान। एक जैसी युनिफॉर्म ये जूतें एवं जुराब, अध्यापकों का सदैव करतें वे गुणगान।।   पढ़ते है जीवनी जैसे यह राम व रहीम, गुरुग्रंथ एवं बाईबल गीता और क़ुरान। ना कोई जानते क्या है जाति क्या धर्म, होते…

  • बेटी का घर | Beti ka Ghar

    बेटी का घर ( Beti ka ghar )    बेटी का नहीं होता कोई अपना घर न्यारा, घर चाहे पिता का हो या पति का, होता है पराया। “पराये घर जाना है” से शुरू होकर, “पराए घर से आई है” पे खत्म हो जाता है ये फ़साना। जिसको बचपन से था अपना माना, बड़ा मुश्किल…

  • शंख नाद | Kavita Shankh Naad

    शंख नाद ( Shankh Naad ) माताओं, बहनों, बालाओं, तैयार हो जाओ ललनाओं, अब गूंज उठा है शंख नाद, हथियार उठाओ ललनाओं, मांगा अधिकार गगन मांगी, जब उफ है किया देहरी लांघी, फिर सबल भी कंधों को कर लो, अब अबला मत कहलाओ, अब गूंज उठा है शंख नाद, हथियार उठाओ ललनाओं, सदियों से बनी…

  • सांवरिया मेंह बरसा दे रै | Saawariya marwadi geet

    सांवरिया मेंह बरसा दे रै ( Saawariya : Marwadi geet )   सांवरिया मेंह बरसा दे रै,सांवरिया मेंह बरसा दे रै। पड़े तावड़ो तपै धरती, मन हरसा दे रै। सांवरिया मेंह बरसा दे रै   यो जेठ रो महीनो ठाडो, आग उगळतो तावड़ो। गर्मी से बेहाल होरया, होरयो मिनट बावळो। आषाढ़ रा बादळ बरसा, सावण…

  • महंगाई | Kavita mehngai

    महंगाई ( Mehngai )   महंगाई ने पांव पसारे कमर तोड़ दी जनता की सुरसा सी विस्तार कर रही बढ़ रही दानवता सी   आटा दाल आसमान छूते भुगत रहे तंगहाली को निर्धन का रखवाला राम जो सह रहे बदहाली को   दो जून की रोटी को भागदौड़ भारी-भरकम होती स्वप्न सलोने सारे धराशाई मजबूरियां…

  • के बी राइटर्स साहित्यिक मंच | KB Writers

    के बी राइटर्स साहित्यिक मंच ( K B Writers saahityik manch )    वार्षिकोत्सव की पावन बेला पर देते आपको बधाई, साहित्यिक गतिविधियों में अद्वितीय सेवाऍं निभाई। छोटे-बड़े और नऐ कलमकारों का इसने दिल जीता, केबी राइटर्स साहित्य मंच की इस-दिन नींव लगाई।। सफ़र संघर्ष का शुरु किया था आपने ०३ वर्ष पहले, धीरे-धीरे कलमकार…

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *