स्त्री योद्धा होती है

स्त्री योद्धा होती है | Stree Yoddha Hoti hai

स्त्री योद्धा होती है

( Stree Yoddha Hoti hai )

खून पानी ही नहीं,
अपनी रंगत भी देती है,
माँ गर्भ धारण कर,
खुशी का संगत देती है।
नौ महीने का सफर आसान नहीं,
हर बच्चे का ओर(गतिविधि) सामान नहीं।
एक में करती बहुत उल्टी,
तो दूसरे में खाती मिट्टी।
चेहरे पर झाई(दाग), पक गये बाल,
आँख कमजोर, चिचुक गई खाल।
अथाह दर्द से चीखें बुलंद,
नस-नस खड़ा, वक्त करता तंग।
सात तह पेट कट गया,
बच्चा जब ब्रीज शिशु रहा ……!
पर सारा दुख दर्द भूल जाती,
बच्चे को जब गले लगाती।
स्त्री योद्धा होती है,
सह्दयी प्रेम-मूरत होती है।
शब्द से कभी आँकलन नहीं करना,
ममता की अद्भुत सूरत होती है ।

प्रतिभा पाण्डेय “प्रति”
चेन्नई

यह भी पढ़ें :-

हिन्दुस्तान को जगाओ | Kavita Hindustan ko Jagao

Similar Posts

  • धोनी के साथ रैना ने भी लिया संन्यास | Dhoni Raina ke sanyas par kavita

    धोनी के साथ रैना ने भी लिया संन्यास! ( Dhoni Raina ke sanyas par kavita )   ये क्या बात हुई ? अभी धोनी के रिटायरमेंट के ग़म में डूबे ही थे, कि ‘रैना’ वही ‘सुरेश रैना’ के रिटायरमेंट की खबर आ गई; ये भी कोई बात हुई? झटके पे झटका दिए जा रहे हैं…

  • हे महामना शत शत प्रणाम

    हे महामना शत शत प्रणाम नैतिकता काशोध शुद्धमर्म सुगंधपुष्प प्रावाह सामालवा महिमा कीपरिभाषाक्रांति शान्ति कादेवदूत ।। युग कालचेतना का प्रहरीईश ईश्वरअविनासी का सत्यसाक्ष्य सरस्वती साधकब्रह्मसत्य का पर्याय।। भारत भूमि काशौर्य पराक्रमनिराश जन मनकि हुंकारयुवा ओजसंरक्षक वचन कर्मधर्म का सनातन ।। कानून विदपत्रकार कर्मजन्म मर्मभारत माता काआँचल काशी और प्रयागगौरव गरिमा कामहामना प्रेरक पुरुषार्थ।। जन मन…

  • प्रेम की भाषा हिंदी | Prem ki Bhasha

    प्रेम की भाषा हिंदी ( Prem ki Bhasha ) ज़बानो के जमघट मेंएक ज़बान है नायाबहमारी ज़बान”हिंदी”जिसमें एक लफ्ज़ केहोते हैं कई मुतादरीफ़। एक “मोहब्बत व ईश्क”कोप्यार कहो या प्रेमसुर कहो या रश्कममता कहो या प्रीतिसंस्कृति कहो रीति रिवाजनाज कहो या लाज…. यह हिन्दी हैमाथे की बिंदी है। मनजीत सिंहसहायक प्राध्यापक उर्दूकुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ( कुरुक्षेत्र…

  • भ्रष्ट नेता | Bhrasht Neta

    भ्रष्ट नेता! लहू जनता का पीता ******** सभी बड़ी हस्तियां शामिल हैं यहाँ के भ्रष्टाचार में फूटी कौड़ी नहीं दी है जनता ने,किसी को उधार में! लाखों करोड़ों की गड्डियां जो निकलती हैं, उनके दराजों से… आम आदमी का लहू है, मटिया तेल नहीं! जो ये टिन के डब्बे में छिपा कर रखते हैं अपने…

  • सुलग रही है | Kavita Sulag Rahi Hai

    सुलग रही है ( Sulag Rahi Hai ) सुलग रही है मातृभूमि के ,सीने पर चिंगारी । आज उऋण होने की कर लें ,हम पूरी तैयारी ।। जगह जगह बारूद बिछी है ,जगह जगह हैं शोले ग़द्दारों को थमा दिये हैं,दुश्मन ने हथगोले लूटपाट क्या ख़ून खराबा, सब इनसे करवा कर भरता है वो अभिलाषा…

  • क्या हम आजाद हैं | Kya Hum Azad Hain

    क्या हम आजाद हैं कहने को आज़ाद तो कहलाते हैं, पर आज़ाद रह नहीं पाते हैं। कोई गुलाम जातिवाद का, कोई राजनीति के गुलाम बन जाते हैं। साम्प्रदायिकता और दलों के फेर में, बंधकर हम रह जाते हैं। अन्याय और अत्याचार सह सहकर, यूं ही घुटकर रह जाते हैं। आज भी देश में दहेज प्रथा,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *