kundaliya chhand

सूर्य अस्त होने लगा | कुण्डलिया छंद | Kundaliya chhand ka udaharan

सूर्य अस्त होने लगा

( Surya ast hone laga )

 

सूर्य अस्त होने लगा,
मन मे जगे श्रृंगार।

अब तो सजनी आन मिल,
प्रेम करे उदगार।।

प्रेम करे उदगार,
रात को नींद न आए।

शेर हृदय की प्यास,
छलक कर बाहर आए।।

आ मिल ले इक बार,
रात्रि जब पहुचे अर्ध्य

यौवन ऐसे खिले,
कि जैसे दमके सूर्य।।

✍?

कवि :  शेर सिंह हुंकार

देवरिया ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें : –

तुम मत रोना प्रिय | Poem tum mat rona priye

 

 

Similar Posts

  • चुगली रस | Chhand in Hindi

    चुगली रस ( Chugli Ras ) मनहरण घनाक्षरी   चुगलखोर कान में, भरते रहते बात। चुगली रस का सदा, रसपान वो करें।   कैकई कान की कच्ची, मंथरा की मानी बात। चौदह वर्ष राम को, वनवास जो करें।   चिकनी चुपड़ी बातें, मीठी मीठी बोलकर। कानाफूसी पारंगत, चुगलियां वो करें।   चुगली निंदा जो करे,…

  • नैनो में सावन | कुण्ड़लिया छन्द

    नैनो में सावन ( Naino mein sawan ) नैनो में सावन लिए , करती हूँ मनुहार । ऐसे मत छेड़ो पिया , लगती जिया कटार ।। लगती जिया कटार , बूँद सावन की सारी । आ जाओ इस बार , विरह की मैं हूँ मारी ।। भीगूँ तेरे संग , यही कहता मनभावन । नही…

  • दीप जलाए प्रेम के | Kundaliya chhand

    दीप जलाए प्रेम के ( Deep jalaye pyar ke : kundaliya chhand )   दीप जलाए प्रेम के,पावन है अति पर्व। अनुरंजन वंदन करें,आज सभी को गर्व।   आज सभी को गर्व,जगत फैला उजियारा। बढ़े  परस्पर  प्रेम, बढ़ाएं  भाईचारा।   लक्ष्मी  देव  गणेश, आरती  मंगल  गाये। खुशियां मिले अपार ,प्रेम के दीप जलाये।     …

  • आइए प्रभु आइए | Chhand

    आइए प्रभु आइए ( Aaiye Prabhu Aaiye ) मनहरण घनाक्षरी छंद   लबों की हो मुस्कान भी पूजा और अजान भी अंतर्यामी प्रभु मेरे दौड़े-दौड़े आइए   जग पालक स्वामी हो हृदय अंतर्यामी हो हाल सारा जानते देर ना लगाइये   पलके अब खोल दो सबको आ संबल दो पीर भरे मेंघ छाये विपदा निवारिये…

  • धीरज | मनहरण घनाक्षरी छंद

    धीरज ( Dheeraj )   नर धीरज धारिये, संयम धरे विचार। धीरे-धीरे बढ़ चलो, ध्वज लहराइये।   धैर्यपूर्वक जो चले, शील गुणी जन जान। धीरे-धीरे मुखर हो, पहचान पाइए।   धीर अमोध अस्त्र है, मृदु वाणी सुरज्ञान। सुर लय तान बन, गीत मीत गाइए।   रणबीर बलवीर, समर न धरो धीर। राष्ट्रहित रणभूमि, वीरता दिखाइए।…

  • स्कंदमाता | माहिया छंद

    स्कंदमाता ( Skandmata )   स्कंदमाता कल्याणी पर्वत निवासिनी रक्षा करें दुर्गा मां   गूंजता दरबार मां जयकार हो रही जले अखंड ज्योत मां   यश वैभवदात्री दो वरदान भवानी सुनो महागौरी मां   जय माता जगदंबे मां शेरावाली आओ दानव दलनी   दुर्गा माता रानी कमल नयन वाली मां जगत की करतार   तुम…

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *