kundaliya chhand

सूर्य अस्त होने लगा | कुण्डलिया छंद | Kundaliya chhand ka udaharan

सूर्य अस्त होने लगा

( Surya ast hone laga )

 

सूर्य अस्त होने लगा,
मन मे जगे श्रृंगार।

अब तो सजनी आन मिल,
प्रेम करे उदगार।।

प्रेम करे उदगार,
रात को नींद न आए।

शेर हृदय की प्यास,
छलक कर बाहर आए।।

आ मिल ले इक बार,
रात्रि जब पहुचे अर्ध्य

यौवन ऐसे खिले,
कि जैसे दमके सूर्य।।

✍?

कवि :  शेर सिंह हुंकार

देवरिया ( उत्तर प्रदेश )

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तुम मत रोना प्रिय | Poem tum mat rona priye

 

 

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