कविताएँ

  • अन्नदाता की पुकार

    अन्नदाता की पुकार ******** हम अन्नदाता है साहब चलते हैं सदा सत्य की राह पर  करते है कड़ी  मेहनत चाहे कड़ी धूप य हो बारिश घनघोर कोहरा या हो कड़ाके की सर्दी दिन हो या काली रात खेतों में लगाता हूं रात भर पानी तब कहीं जाकर उगाता हूं अन्न सोता नहीं चैन की नींद…

  • तुम न जाओ

    तुम न जाओ   सूने उपवन में गहन घन प्रीति गाओ तुम न जाओ।। मेरे अन्तर्मन अभी तुम रुक भी जाओ तुम जाओ।। स्वाती बिन प्यासा पपीहा देखा होगा, रात भर जगती चकोरी सुना होगा, मैं तना हूं तुम लता बन लिपट जाओ तुम न जाओ।।तुम न० प्रेम तो एक हवा का झोंका नहीं है,…

  • हमसफ़र

    हमसफ़र   हमसफ़र वही हमराज वही, उनका अलग अंदाज सही। सुख-दुख में जो रहें साथ , परिवार पर तनिक न आए आंच। बल कई गुणा बढ़ जाए विपत्ति आए टिक न पाए न अंधकार हमें डराए जीवन सरलता से कट जाए सतरंगी बहार सदा रछाए जब शुभ आगमन इनका हो जाए असूल की हैं पक्की…

  • याद आता है

    याद आता है   सर्दी की गुनगुनी धूप में वो तेरा पार्क में बैठ तेरा अपनी आँखों से मुझे अनिमेष तकना और मेरा हाथ थामना याद आता है……   तुम्हारा मेरी हथेलियों में अपना हाथ थमा देना अपनी उंगलियों को मेरी उंगलियों में उलझा देना और फ़िर धीरे धीरे अपनी उंगलियों से मेरी हथेली पर…

  • करवा चौथ | Hindi poem On karwa chauth

    करवा चौथ ( Hindi poem On karwa chauth )   चाँद का कर लूं सनम दीदार मैं प्यार से जो बंधा करवा चौथ है   उसकी चूड़ी उसकी देखो बिंदिया  मुस्कुराती  सूरत करवा चौथ है   हो गया दीदार अपनें चाँद का प्यार का आया वो करवा चौथ है   सज गयी है चाँद की …

  • पढ़ें लिखे मुख्यमंत्री का फायदा

    पढ़ें लिखे मुख्यमंत्री का फायदा ******** जनता का देश का है फायदा ही फायदा जो पुल सड़क निर्माण में करोड़ों है बचाया वादा जो किया निभाया आम आदमी में एक उम्मीद जगाया बेटा बन बुजुर्गो का रखा ख्याल पहुंचाया घर राशन हर हाल जो कहे सो करे! जनता के लिए सड़क पर भी आ लड़े…

  • पढ़ पाऊँ

    पढ़ पाऊँ   हमेशा से ही मेरी हरसत रही है ये कि मैं भी कभी देखूँ किसी को सामने बैठा कर उसकी झील सी आँखों में अपने को डुबो कर….! एक ख्वाहिश ही रही कि उसकी आँखों को पढ़ पाऊँ क्या लिखा है उसके दिल में क्या चाहत है उसकी क्या दर्द है उसकी आँखों…

  • थोड़ा उदास हूँ

    थोड़ा उदास हूँ   पिछले कई दिनों से मन थोड़ा #उदास रहने लगा है समझ नहीं आ रहा कि क्या करें हम एक ही बात बार-बार #मन में हर बार आ रही है कि हर बार मेरे ही साथ ऐसा क्यूँ होता है..?   उन्हीं की बातों को #दिल से लगाकर विचारों की #मथनी चलती…

  • शायद हम बच्चे हो गए

    शायद हम बच्चे हो गए   शायद हम बच्चे हो गए शायद अब हम बच्चे हो गए       क्यूंकि      अब बच्चे बड़े हो गए…. अब न सुबह जल्दी       उठने की हड़बड़ी….. न जल्दी खाना     बनाने की फरमाइशें…. न बजट की खींचातानी    न कल की चिंता…..  न तर्क करता कोई      न…

  • प्रियवर

    प्रियवर   मेरे तन मन प्रान महान प्रियवर। प्रात:सांध्य विहान सुजान प्रियवर।।   इस असत रत सृष्टि में तुम सत्य हो, नित नवीन अनवरत पर प्राच्य हो, मेरे अंतस में तुम्हारा भान प्रियवर।।प्रात:०   ललित वीणा तार तुमसे है सुझंकृत, ये षोडस श्रृंगार तुमसे है अलंकृत, प्रेयसी का मान स्वाभिमान प्रियवर।।प्रात:०   प्रणयिका बन चरण…