प्रियवर

प्रियवर

प्रियवर

 

मेरे तन मन प्रान महान प्रियवर।
प्रात:सांध्य विहान सुजान प्रियवर।।

 

इस असत रत सृष्टि में तुम सत्य हो,
नित नवीन अनवरत पर प्राच्य हो,
मेरे अंतस में तुम्हारा भान प्रियवर।।प्रात:०

 

ललित वीणा तार तुमसे है सुझंकृत,
ये षोडस श्रृंगार तुमसे है अलंकृत,
प्रेयसी का मान स्वाभिमान प्रियवर।।प्रात:०

 

प्रणयिका बन चरण की चेरी हुयी मैं,
आ मुझे ले चल कि अब तेरी हुयी मैं,
असह्य हृदय पीर को पहचान प्रियवर।।प्रात:०

 

मैंने ठुकराया जगत के द्वंद्व को,
इससे आगे क्या लिखूं मतिमंद को,
मृत्यु ही अब लग रही आसान प्रियवर।।प्रात:०

 

?

कवि व शायर: शेष मणि शर्मा “इलाहाबादी”
प्रा०वि०-बहेरा वि खं-महोली,
जनपद सीतापुर ( उत्तर प्रदेश।)

यह भी पढ़ें :

क्या कहना

 

Similar Posts

  • दादी माँ की मन्नत | Kavita Dadi Maa ki Mannat

    दादी माँ की मन्नत ( Dadi maa ki mannat )    माॅंगी जो हमनें मन्नत एक, रखना ईश्वर हम सबको एक। यह बैर किसी से हो नही पाएं, प्रेम-भाव से रहे हम सब सारे।। जैसे गुज़रें है अब तक दिन, आगे भी गुज़रें ऐसे ही दिन। सब कुछ दिया है आपने ईश्वर, आगे भी कृपा…

  • श्री राम कथा | Shri Ram Katha

    श्री राम कथा ( Shri Ram Katha )   श्री राम कथा वंदन शुभकारी त्रेता युग हिंद अखंड धरा,अयोध्या नगरी अनूप । दिव्य भव्य रघुवंश कुल,दशरथ लोकप्रिय भूप । कैकयी सुमित्रा कौशल्या,तीन राज राज्ञी गुणकारी । श्री राम कथा वंदन शुभकारी ।। राम भरत शत्रुघ्न लक्ष्मण,चार आज्ञाकारी पुत्र । श्रवण प्राण हरण कारक,राजा दुःख कष्ट…

  • हिन्दी के अन्तर के स्वर

    हिन्दी को भारत की राष्ट्रभाषा मान्य किये जाने के लिये १९७५ में लोकसभा में प्रस्तुत प्रस्ताव अमान्य कर दिये जाने के क्षोभ और विरोध में “हिंदी के अंतर के स्वर” शीर्षक रचना लिखी गई।१९७६ में मारीशस के द्वितीय विश्व हिंदी सम्मेलन में यह रचना प्रस्तुत हुई तो यह वहाॅं प्रशंसित और अभिनन्दित हुई।इस रचना के…

  • डॉ. सुनीता सिंह ‘सुधा’ की रचनाएँ | Dr. Sunita Singh Sudha Poetry

    गणेश पूजन है! श्री गणेशाय नमःछंद-मनहरण घनाक्षरी शिव शक्ति के हैं प्यारे, जगत भर में न्यारे,गजानन गणेश को,हमारा नमन है ! गणपति सुखकर्ता, भव बाधा सब हर्ता,एकदंत चरणों में,सदैव वंदन है ! रिद्धि सिद्धि के है पति, देते सबको सन्मति,बुद्धि यश प्रदाता वो,पार्वती नंदन है ! प्रतिदिन सेवा करूँ , वियानक का ध्यान धरुँ,कामिनी करती नित,गणेश…

  • तारक मेहता का उल्टा चश्मा

    तारक मेहता का उल्टा चश्मा °°°°°° –> ऐपिसोड हुए 3000 अभी, आगे भी होने बांकी हैं |?|   1.निश दिन नूतन संदेशा लाते, खुद हँसते और हंसाते हैं |   अलग-अलग है कल्चर फिर भी, संग-संग रोते-गाते हैं |   गोकुल धाम केे सब हीरे-मोती, एक धागे मे पिरोये हैं |   उदासी मे खुशियां…

  • किताब | Kitab par kavita

    किताब ( Kitab )   ज्ञान सिंधु में गोते लगा लो पुस्तकों  से  प्यार  करो आखर आखर मोती महके मन में जरा विचार करो   ज्ञान विज्ञान सारा समाया तजो क्रोध लोभ मोह माया त्याग तपस्या पराक्रम भारी वीरों की गाथा को पाया   साधु संतों मुनियों ने लिखी वैद्य वकील वैज्ञानिक ने कहीं इंजीनियर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *