कविताएँ

  • कड़वी बातें | Poem kadvi baatein

    कड़वी बातें ( Kadvi baatein )   इंसान की पेहचान संपति से कहा होय। जो करे समाज सेवा उसकी जगह स्वर्ग में होय।   जो मेहनत करके कमाए वो सान से जी पाए। बुरे काम करके पैसा कमाने वाले निचे नज़र जुकाके चलता जाए   जगत जाने उसे जिसके  पास माँ बाप होय। उसे कौन…

  • लड़की हूँ तो क्या हुआ | Ladki hun to kya hua | Kavita

    लड़की हूँ तो क्या हुआ ( Ladki hun to kya hua )     दुनिया में पीड़ा बहूत है कब तक तु अपने दुखों को गाएगी इस मतलब भरी दुनिया में क्या तु अपने लिए सहारा ढूँढ पाएगी   अकेली निकल उजाले की खोज में अंधकार भी पीछे छूट जाएगा। और जहाँ तक बात रही…

  • दुःख होता है | Dukh hota hai

    दुःख होता है ( Dukh hota hai )     तेरे हंसने पर मैं भी हँसने लगता हूँ तेरे दुःख से मुझे भी दुःख होता है तेरे दुःखी होने पर भी मुझे दुःख होता है तेरे रोने पर मुझे भी रोना आता है।   पर, मैं तेरे साथ रो नहीं पाता हूँ…. इसका ग़म मुझे…

  • मिलाते तो सही | Milate to sahi poem

    मिलाते तो सही ( Milate to sahi poem )   आवाज़ से आवाज़ मिलाते तो सही….! दिल से दिल मिलाते तो सही…..! मन से मन मिलाते तो सही…..! हाँ में हाँ मिलाते तो सही…….! सुर से सुर मिलाते तो सही…..! हाथ से हाथ मिलाते तो सही…..! नज़र से नज़र मिलाते तो सही……! क़दम से कदम…

  • मंजिल का एहसास | Prernadayak poem

     मंजिल का एहसास ( Manzil ka ahsas )     यूं ही तो नही ये मेरे मेरे सपनों की उड़ान है, कुछ तो है मन के अंदर तो जुड़ा हुआ है इससे। कुछ तो है जो कर रहा है प्रेरित इस कदर से कि अब ये चुनोतियाँ बाधा नही बन सकती हैं।।   क्या है…

  • मुहूर्त | Muhurat par kavita

     मुहूर्त  ( Muhurat )   क्यों भागे मनवा व्यर्थ मुहूर्त के पीछे || 1.न जन्म मुहूर्त से हुआ, न मृत्यू होगी किसी मुहूर्त मे | फिर क्यो सारी जिन्दगी घूमें, शुभ मुहूर्त के चक्कर मे | क्या शुभ है क्या अशुभ, सब आधीन है प्रकृति सूत्र मे | फिर क्यों सारी जिन्दगी ढूंडे, खट्टापन मीठी…

  • यकीन | Yakeen kavita

     यकीन  ( Yakeen )   ये मुझ पर सब का”यकीन”है || 1.नौ महीने कोख मे, मुझे पाला पोसा-मात ने | जन्म दिया पीडा सही, और दूध पिलाया मात ने | बचपन की अठखेलियां, गीला-सूखा सहती रही | आँख का उसके तारा हुँ, पूरे यकीन से कहती रही | ये मुझ पर मेरे माँ का “यकीन”है…

  • चूडियाँ | Kavita choodiyaan

     चूडियाँ  ( Choodiyaan )   सोलह श्रंगारों मे “चूडी” || 1.चाँद सा गोल आकार, कुछ बड़ी कुछ छोटी सी | रंगीन कुछ सतरंगी सी, कुछ पतली कुछ मोटी सी | सोने पीतल और चाँदी की, कुन्दन काँच मोती की | हांथो मे बजती खन-खन, कलाई सजाती गोरी की | सोलह श्रंगारों मे “चूडी” || 2.लाल…

  • खत् | Khat par kavita

    खत् ( Khat )   हमारे “खत्” ही थे एक सहारे….||✉️|| 1.कलम उठा के कागज पर, अरमान दिलों के लिख डाले | मम्मी-पापा सब कैसे रहते हैं, सब हाल घरों के लिख डाले | मुहल्ले-पडोस की खट्टी-मीठी, सब चाहत-बातें-दिल काले | खत् लिख पोस्ट किया अब बैठे, जबाब की चाह मे दिल वाले | हमारे…

  • किसान | Kisan par kavita

     किसान  ( Kisan )   क्या करें मजबूर किसान….|| 1.बैलों को हल मे नह दिया, पसीना बहाये किसान | सून-सान पड़ी जमीन पर, हल रहा चलाये किसान | बीज डाल पानी सींचा, अब चौंकीदारी होने लगी | भरपूर फसल का सपना ले, खुशिहाली होने लगी | क्या करें मजबूर किसान….|| 2.दिन दोपहरी रात-दिन, मेहनत कड़ी…