यकीन

यकीन | Yakeen kavita

 यकीन 

( Yakeen )

 

ये मुझ पर सब का”यकीन”है ||

1.नौ महीने कोख मे, मुझे पाला पोसा-मात ने |
जन्म दिया पीडा सही, और दूध पिलाया मात ने |
बचपन की अठखेलियां, गीला-सूखा सहती रही |
आँख का उसके तारा हुँ, पूरे यकीन से कहती रही |

ये मुझ पर मेरे माँ का “यकीन”है ||

2.बडा हो पकड कर उंगली, साथ पिता के निकल पड़े |
जहाँ भी फिसला पैर मेरा, हांथ पकड फिर उठा चले |
पढना-लिखना-खाना-पीना, सारी जरूरतें पूरी करीं |
पसीना बहा मेरी आस की, मेरी खुशी की कीमत भरीं |

ये मुझ पर मेरी पिता का “यकीन” है ||

3.विध्यालय महा विध्यालय गया,मिले मुझे गुरूजन मेरे |
पढना-लिखना सिखा के देखा, है भला-बुरा क्या साथ मेरे |
क-ख-ग से एम.ए.बी.ए.तक, सब पाठ पढाया ग्यान से |
आगे चल कर कामयाबी की, मुझे राह दिखाई ध्यान से |

ये मुझ पर मेरे गुरू का “यकीन” है ||

4.मेरी माँ बोली ये ईश्वर है, दिखला कर एक मूर्ती |
पिता का कहना ईश्वर देता, खाना पीना खूब-सूरती |
गुरू ने ईश्वर बन्दना को, बतालाया महान जीवन में |
माता पिता गुरू ही रब मेरे, कहता हूँ पूरे यकीन से |

ये मेरे रब पर मेरा “यकीन” है ||

 

 

कवि:  सुदीश भारतवासी

 

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  1. मैं भारतवासी हूं भारत में रहता हूं पूरी निंदा के साथ जनता के घर जाता हूं जो भी जो भी जनता कार है पूरे निंदा के साथ निभाता हूं यही मेरा सौभाग्य है जनता की सेवा करना जय हिंद जय भारत

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