Tag: कविता
अनोखा फैसला
अनोखा फैसला **** सुन आई हंसी और हुआ आश्चर्य जब फैसला सुनाया गया भाई! मुझसे तो ना रहा गया दुनिया का अनोखा और संभवतः इकलौता है मामला पहले भी आपने बाबरी मस्जिद विध्वंस जेसिका हत्याकांड और न जाने कितने फैसले देखे सुने होंगे, आश्चर्यचकित भी हुए होंगे! एक और फैसला आया है- जिसमें इंसान हुआ…
पुरस्कार मिले या तिरस्कार
पुरस्कार मिले या तिरस्कार यथार्थ की धरातल पर खड़े होकर , सच को कर लूँगा स्वीकार पुरस्कार मिले या तिरस्कार | ना कभी डगमगाऊंगा , कभी नहीं घबराऊंगा , झंझावातों से टकराऊंगा , मजधारों से हाथ मिलाऊँगा , हिम्मत नहीं मैं हारूँगा | सब कुछ कर लूँगा स्वीकार , पुरस्कार मिले या तिरस्कार…
मेरी पहचान बता
मेरी पहचान बता मैं लड़की हूं इसे छोड़ मेरी पहचान बता घर मेरा मायका है या ससुराल मेरा मका बस एक बार तू मेरा पता बता मैं लड़की हूं इसे छोड़ मेरी पहचान बता मैं अमृत हूं विष समझकर न सता मौन कर दिया तूने मुझे बेटे के समान बता मैं लड़की…
बेटियों को मजबूर नहीं मजबूत बनाइए
बेटियों को मजबूर नहीं मजबूत बनाइए क्या हम वही हैं जो हमें होना चाहिए ? जब हमारे अंदर इंसानियथत ही नहीं तो क्या हमें जीना चाहिए ? आज के परिवेश में इस प्रश्न पर सोचिए और विचारिए ! बड़ा अहम सवाल है केवल दांत मत चियारिए ! बेटियाँ केवल मेरी और आपकी…
सुभाष चंद्र बोस ने कहा था ( कविता )
सुभाष चंद्र बोस ने कहा था ( कविता ) ‘नेता जी’ निज हिन्द सैना से, जोश मे भर यूं कहे खङे। सबक सिखाना है दुश्मन को फैसले लेगे आज कङे ।। ‘जयहिंद’ बोल के समर-भूमि मे, कदम मिलाते चलो बढे। ऐसा जोश जिगर मे भर लो, दस-दस के संग एक लङे ।।…
प्रवास
प्रवास अश्रुधारा हृदय क्रंदन दहन करता। प्रिय तुम्हारा प्रवास प्राण हरन करता।। नभ में देखा नीड़ से निकले हुये थे आंच क्या थोड़ी लगी पिघले हुये थे, उदर अग्नि प्रणय पण का हनन करता।।प्रिय० तुम कहे थे पर न आये क्या करूं मैं इस असह्य विरहाग्नि में कब तक जलूं मैं, कांच…
बोल कर तो देखो
बोल कर तो देखो सुनो- तुम कुछ बोल भी नहीं रहे हो यहीं तो उलझन बनी हुई है कुछ बोल कर दूर होते तो चल सकता था….. अब बिना बोले ही हमसे दूर हो गए हो ये ही बातें तो दिमाग में घर कर बैठी है अब निकालूँ भी तो कैसे कोई…
और क्रंदन
और क्रंदन थकित पग में अथक थिरकन और क्रंदन। आंसुओं का बरसा सावन और क्रंदन।। हृदय से उस चुभन की आभास अब तक न गयी। सिंधु में गोते लगाये प्यास अब तक न गयी ।। बढ़ रही जाने क्यूं धड़कन और क्रंदन । थकित बालक समझ मुझको धूल ने धूलित किया…
अपना भारत फिर महान हो जाता
अपना भारत फिर महान हो जाता ******** ऊंची मीनारों में रहने वालों जरा रहकर इक व्रत देख लेते एहसास हो है जाता भूख होती है क्या? मजलूम मजदूरों का निवाला छीन कर खाने वालों, एहसास हो है जाता भूख से बिलखते बच्चों की भूख होती है क्या? इन बच्चों में जो देख लेते अपना…
रक्षक
रक्षक जन्म लेकर जब वह आंख खोलती है देख कर दुनिया जाने क्या सोचती है भरकर बाहों में है प्यार से उठाता शायद इसे ही मां कहा जाता चारों तरफ है लोगों की भीड़ किससे कौन सा रिश्ता नाता कोई भाई, चाचा कोई तो कोई मेरा पिता कहलाता मैं तो ढूंढूं उसे…