अनोखा फैसला

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सुन आई हंसी
और हुआ आश्चर्य
जब फैसला सुनाया गया
भाई! मुझसे तो ना रहा गया
दुनिया का अनोखा
और संभवतः इकलौता है मामला
पहले भी आपने बाबरी मस्जिद विध्वंस
जेसिका हत्याकांड
और न जाने कितने फैसले
देखे सुने होंगे,
आश्चर्यचकित भी हुए होंगे!
एक और फैसला आया है-
जिसमें इंसान हुआ बरी,
और इंजन की हुई दुर्गति।
जी हां!
एकदम सही सुना आपने
इंजन को गिरफ्तार कर जब्त किया गया ।
मामला असम के लामडिंग रिजर्व फारेस्ट का है-
27 सितंबर को मालगाड़ी के टक्कर से
एक हथिनी और
उसके नन्हें बच्चे की मौत हुई
मुकदमा हुआ
पायलट व सहायक को निलंबित किया गया
लेकिन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के आंतरिक जांच निष्कर्ष पर
20.10.2020 को इंजन को गिरफ्तार कर जब्त किया गया !
इतिहास में यह शायद पहला मामला है?
जब इंसान की आपराधिक लापरवाही की सजा इंजन को दिया गया!
यह हमारे कानूनी प्रक्रिया पर गंभीर व्यंग्य है
अधिकारी यांत्रिक तरीके से कानून लागू करते हैं,
और कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी कर
दायित्व से मुक्त हो जाते हैं।
ऐसे में बेहतरी की गुंजाइश नहीं हो सकती,
हमारे यहां मासूम बच्चों को भी
मुकदमों में नामजद कर दिया जाता है।
ऐसे तंत्र और समाज से हाथियों
या अन्य जीवों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने की अपेक्षा कैसे कर सकते हैं?
गति सीमा का उल्लंघन पायलट ( इंसान) ने किया
फिर सजा इंजन को क्यों?
उसे जब्त कर विभाग करता संदेश देना चाहता है?
इंसानी लापरवाही का ठीकरा इंजन पर मढ़ साफ बचना चाहता है।
बाबा साहब ने कहा था-
“कानून लागू करने वाले लोग अच्छे न हों
तो एक अच्छा संविधान भी बुरा साबित होता है।”
दुर्भाग्य से हमारे देश में
कानून लागू करने वाले लोग
अक्षरों के पीछे की मंशा नहीं समझ सके
तंत्र संवेदनशील नहीं बन पाया
हाथी कटते रहते हैं
मुकदमा चलता रहता है
कुछ दिनों के निलंबन के बाद
मामला दब जाता है
दबा दिया जाता है!
पुनः हादसे के वक्त याद आता है,
तब तक एक और हादसा हो जाता है।
यही क्रम चलता रहता है,
सिस्टम हाथ पर हाथ धरे रहता है!

 

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नवाब मंजूर

 

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

 

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