Tag: शेरो-शायरी
साफ दिल ग़र है तेरा छलेंगे तुझे
साफ दिल ग़र है तेरा छलेंगे तुझे साफ दिल ग़र है तेरा छलेंगे तुझे। लोग अपने-पराये मिलेगे तुझे।। वक्त पे काम आते नहीं ये कभी। आँख- सी फेर आगे बढेगे तुझे।। अनसुना सा करेगे हर बात को। काम कर देंगे ऐसा कहेंगे तुझे।। बाद में काम अपना निकल जाए जब। लांघ…
कहीं ग़म कहीं पे ख़ुशी है
कहीं ग़म कहीं पे ख़ुशी है कहीं ग़म कहीं पे ख़ुशी है! कहीं पे हंसी तो नमी है कोई जीवन अच्छा गुजारे कहीं ग़म भरी जिंदगी है मुहब्बत को कोई निभाये कहीं दिल में ही बेरुख़ी है कोई रिश्ता दिल से निभाता कहीं हर घड़ी बेदिली है कहीं पे …
याद करते थे भुलाने में लगे
याद करते थे भुलाने में लगे याद करते थे भुलाने में लगे! वो पराया अब बनाने में लगे सच बताकर वो ही सबसे झूठ को दाग दामन से मिटाने में लगे दोष क्या दूँ मैं औरो को देखिए घर मेरा अपनें ही जलाने में लगे दिल दुखाकर वो वफ़ा में…
जो बीत गयी वो बात नहीं
जो बीत गयी वो बात नहीं जो बीत गयी वो बात नहीं जो गुजर चुकी वो रात नहीं मैं खाली हूँ अपनें पन से क्यों इश्क़ करुं मैं बेमन से मैं टूट रहा लम्हा लम्हा हाँ जीता रहूंगा मैं तन्हा अब तू भी नहीं तेरा साथ नहीं अब दर्द नहीं ज़ज्बात…
दिल में किसी की याद इतनी भर गई
दिल में किसी की याद इतनी भर गई दिल में किसी की याद इतनी भर गई। चाहा मिटाना लाख फिर से उभर गई।। उनको हमारी याद आती जरूर है। शामो-सहर अपने वो मेरे नाम कर गई।। हम पर असर यादों का ऐसा कुछ हुआ। वीरान सारी जिंदगी गुजर गई।। दिल…
करोगे प्यार तो (गीत )
करोगे प्यार तो (गीत ) करोगे प्यार तो दुनिया ये दिल दुःखाएगी। वफ़ा के नाम पर धौखे तुझे खिलाएगी।। खुशी की चाह में ग़म से ही सामना होगा। उदास जिंदगी यहीं आके ठहर जाएगी।। वीरान राह में भटकते रहोगे शामो-सहर। बहार दूर तलक कहीं भी नज़र ना आएगी। थे साथ गुज़रे…
न कर फरियाद दुनिया से
न कर फरियाद दुनिया से न कर फरियाद दुनिया से सहारे भी नहीं मिलते। कभी मझधार में आकर किनारे भी नहीं मिलते।। गुलो-गुलजार की पहले सी वो रौनक कहां है अब ? यूं मौसम ए ख़िजां में अब बहारें भी नहीं मिलते ।। यहां जीवन सभी का ही हमें वीरां बहुत लगता।…
उसकी यादें के आंसू है आंख में
उसकी यादें के आंसू है आंख में उसकी यादें के आंसू है आंख में! आ गयी लाली ग़मों की आंख में देखता हूँ आईना आती नजर क़ैद सूरत हो गयी वो आंख में दें गया वो बेवफ़ाई के आंसू छोड़ गया ग़म ए असर वो आंख में आंख से क्या…
दिल लगाने की यहां सबको सजा मिलती है
दिल लगाने की यहां सबको सजा मिलती है दिल लगाने की यहां सबको सजा मिलती है। दिल लरज़ता है कभी रूह भी यहां तङफती है ।। कौन रूसवा ना हुआ आकर यहां गलियों में। पंक में ही तो मुहब्बत की कली खिलती है।। नाम थकने का न लेती है ज़माने में…
उठ गये थे वो क़दम जो बेख़ुदी में
उठ गये थे वो क़दम जो बेख़ुदी में उठ गये थे वो क़दम जो बेख़ुदी में! चोट खायी प्यार में ही इसलिए है होश आया तो ये जाना जीवन क्या है वरना डूबा था मुहब्बत के नशे में जिंदगी में दुख बहुत देखें ख़ुदाया चाहता हूँ मैं ख़ुदा ये ही ख़ुशी…