रक्षक
रक्षक जन्म लेकर जब वह आंख खोलती है देख कर दुनिया जाने क्या सोचती है भरकर बाहों में है प्यार से उठाता शायद इसे ही मां कहा जाता चारों तरफ है लोगों की भीड़ किससे कौन सा रिश्ता नाता कोई भाई, चाचा कोई तो कोई मेरा पिता कहलाता मैं तो ढूंढूं उसे…
सत्यमेव जयते विजय सत्य की होती है, आए कठिनाई कितनी भी।। सत्य ही जीवन का सार शक्ति इसकी बेशुमार महिमा इसकी अपरंपार कुंद पङे ना इसकी धार लङ के हार जाती सब है यहां बुराई जितनी भी। विजय सत्य की होती है, आए कठिनाई कितनी भी।। l ‘राम’-‘कृष्ण’ का जीवन देखा…
सड़क पहुंच सुदूर क्षितिज धरा तक सुंदर रेखा मात्र दिखती हूं, श्याम वर्णी स्वस्थ सलोने गात दिन रात अटखेलियां खेलती हूं, पकड़ पगडंडी की राह पाया चतुर्भुज रूप चंचला आगे बढ़ती,संवरती हूं अनुपम अवतरित छटा, अव्यवस्थित पर अति आर्द्र शीत की उष्णता में तपती हूं।। अवस्थापन से हर्षातिरोक्ति हुयी कब जब मेरे कतरों की…
डर के आगे जीत है (दोहे) **** (मंजूर के दोहे) ****** १) डर से हम डरते नहीं , ना इसकी पहचान। डराओ ना जग मुझको, मैं भी अब शैतान ।। २) डर कर जीया अभी तक,पकड़ लिया अब कान। जैसे को तैसा करूं,देख जगत हैरान।। ३) डरोना कभी किसी से,अक्ल से लो तुम काम। डराने…
कुछ दिन पहले कुछ दिन पहले मैं आकर्षित हो गया था उसके गौर वर्ण पर उसके मदहोश करते लफ़्ज़ों पर उसके उभरे उरोजों पर…… उसने कहा था- तुम भी मुझे अच्छे लगते हो मैं जुड़ तो सकती हूं पर…… कैसे तेरे साथ आ सकती हूं.? शंकाओं ने घेरा हुआ है आऊँ…