डर के आगे जीत है

डर के आगे जीत है (दोहे)

डर के आगे जीत है (दोहे)

****

(मंजूर के दोहे)

******

१)

डर से हम डरते नहीं , ना इसकी पहचान।
डराओ ना जग मुझको, मैं भी अब शैतान ।।

२)

डर कर जीया अभी तक,पकड़ लिया अब कान।
जैसे को तैसा करूं,देख जगत हैरान।।

३)

डरोना कभी किसी से,अक्ल से लो तुम काम।
डराने वाले को तुम, दो उत्तर उर तान।।

४)

डर पर विजय जो पावे,सफल वही हो पाए।
अभिमान को जीए मरे,वीर वही कहलाए।।

५)

डर आनंद में बाधक, उत्सव करे बेरंग।
त्याग मजा लें निर्बाध, समझो जीते जंग।।

६)

डर के आगे जीत है,अबहीं दो तुम त्याग।
सफलता की ओर बढ़ो, आगे आगे भाग।।

 

?

नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

 

यह भी पढ़ें :

जीवन का आनंद (दोहे)

 

Similar Posts

  • विदा | Kavita

    विदा ( Vida ) तुम कह देना उन सब लोगों से, जिन्हें लगता है हम एक दुजे के लिए नहीं. जो देखते है सिर्फ़ रंग, रूप और रुतबा जिन्होंने नहीं देखा मेरे प्रेम की लाली को तुम्हारे गलो को भिगोते हुए. जो नहीं सुन पाए वो गीत जो मैंने कभी लफ़्ज़ों में पिरोए ही नहीं….

  • गणेश स्तुति | Ganesh Stuti

    गणेश स्तुति ( Ganesh Stuti )   कवि जन की कलम हो तेजस्वी कुछ ज्ञान प्रकाश दो गणपति जी निज सेवक जान अनुग्रह का वरदान दो मेरे गणपति जी हम सबके नाव खेवैया हो तुम पालक सृष्टि रचैया हो हो मातु पिता गुरु स्वामी तुम कण- कण में तुम्हीं बसैया हो संताप कष्ट हो या…

  • मैं कान हूॅं | Kaan par Kavita

    मैं कान हूॅं ( Main kaan hooain )    हाॅं जनाब मैं कान हूॅं लेकिन आजकल परेशान हूॅं, मेरी समस्याऍं बहुत सारी है इसीलिए मैं हैरान हूॅं। मुझको जिम्मेदारियाॅं सिर्फ सुनने की ही दी गई है, इसीलिए ताली गाली अच्छा बुरा सुनता रहता हूॅं।। मैं अपना दुःख व दर्द किसी को नहीं बता सकता, न…

  • तुम ही तो माँ | Kavita Tum Hi to Maa

    तुम ही तो माँ ( Tum Hi to Maa ) सुबह सवेरे जब तुम मुझे उठाती थी, एक रौशनी सी मेरे आंखों को छू कर जाती थीं। उठ कर, हाथों से जब मैं आंखें मलती थी, ” सुबह हो गई बेटा ” कह कर तुम सीने से मुझे लगाती थी। देख कर तुम्हारी प्यारी सी…

  • प्रभु दो ऐसा वरदान | Prabhu do Aisa Vardan

    प्रभु दो ऐसा वरदान ( Prabhu do aisa vardan )    प्रभु!ज्ञान प्रभा शोभित हिय, दो ऐसा वरदान मृदुल मधुर ह्रदय तरंग, स्वर श्रृंगार अनुपम । विमल वाणी ओज गायन, ज्योतिर्मय अन्तरतम । मानस सर नवरस लहर, गुंजित मधुमय गान । प्रभु!ज्ञान प्रभा शोभित हिय,दो ऐसा वरदान ।। दुर्बल छल बल मद माया, प्रसरित जग…

  • सावन महिना भाता है | Sawan Mahina Bhata Hai

    सावन महिना भाता है ( Sawan Mahina Bhata Hai ) सावन का महीना चल रहा शिव-पार्वती जी का आराम। गृहस्थ और कुवारों को भी काम काज से मिली है छुट्टी। जिसके चलते कर सकते है शिव-पार्वती जी की भक्ति। श्रध्दा भक्ति हो गई कबूल तो मिल जायेंगे साक्षात दर्शन।। कहते है साधु-संत और भक्तगण होता…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *