Teej ka Tyohar

तीज का त्यौहार | Teej ka Tyohar

तीज का त्यौहार

( Teej ka tyohar ) 

 

तीज का आया यह प्यारा त्यौहार,
बादलों से बरस रही हल्की फुहार।
सातरंग में रंगा है प्यारा आसमान,
चारों और छाया यह बसन्त बहार।।

हरा भरा हो गया यह सारा जहान,
झूलें का मौसम में खास परिधान।
हरें पत्तों- लताओं से झूला सजाते,
झूला झूलकर जैसे गगन को छूते।।

मिलझुल कर तीज का पर्व मनातें,
घेवर और गुजिया सब घर बनातें।
परदेशी नौजवान आते अपनें घर,
धूमधाम से गीत के तराने ये गातें।।

कहतें सब इसको हरियाली तीज,
होती है मोहब्बत की सदैव जीत।
स्त्री लहॅंगा चुनर पहनें पीले, ग्रीन,
प्यारा ये पर्व जीत लेता मन मीत।।

महिलाऍं करती है इसदिन श्रृॅंगार,
हाथों में मेहन्दी करें व्रत उपवास।
माता गोरी का करती सभी ध्यान,
जिससे पूरी होती सभी की आस।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • कर्म पथ | Karm Path

    कर्म पथ ( Karm Path )   जुड़ने की कोशिशों मे टूटा हूं कई बार अपनों के साथ होने मे छूटा हूं कई बार पहुंचकर भी ऊंचाई तक गिरा हूं कई बार फिर भी अभी हारा नही हूं कमजोर जरूर हूं,बेचारा नही हूं…. मरते देखा हूं कई बार अपनों के नाते ही स्वाभिमान को कर…

  • शहीदे आजम भगत सिंह | Bhagat Singh par kavita

    शहीदे आजम भगत सिंह ( Shaheed-E-Azam Bhagat Singh )     राजगुरु सुखदेव भगतसिंह हमको आजाद चाहिए वतनपरस्ती दिलों में जोशीले जज्बात चाहिए   भारत मां को वीर सपूत धरा को बलिदान चाहिए आजादी का दीवाना हमें भगतसिंह जवान चाहिए   सरजमी पर मिटने वालों का दौर फिर लाना होगा वतन की पुकार फिर से…

  • बड़े मामले में विफल होती सीबीआई!

    बड़े मामले में विफल होती सीबीआई! ****** हाईप्रोफाइल मामलों में विफल होती सीबीआई, यह बात कुछ हजम नहीं होती भाई ! बोफोर्स तोप घोटाला, 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला। कर्नाटक खनन घोटाला- जिसमें मुख्यमंत्री येदियुरप्पा थे अभियुक्त, या आरूषि हत्याकांड जिसमें सीबीआई थी नियुक्त; जांच नहीं कर पायी युक्तियुक्त। मस्जिद ढ़ांचा विध्वंस मामले में भी- सीबीआई…

  • ‘वाचाल’ की हरियाणवी कुंड़लियाँ

    ‘वाचाल’ की हरियाणवी कुंड़लियाँ तड़कै म्हारे खेत में, घुस बेठ्या इक साँड़।मक्का अर खरबूज की, फसल बणा दी राँड़।।फसल बणा दी राँड़, साँड़ नै कौण भगावै।खुरी खोद कै डुस्ट, भाज मारण नै आवै।।फुफकारै बेढ़ाल़ भगावणिये पै भड़कै,घुस्या मरखणा साँड़ खेत में तड़कै-तड़कै।। बहुअड़ बोल्ली जेठ तै, लम्बा घूंघट काढ़।दीदे क्यूँ मटकावता, मुँह में दाँत न…

  • जीवन संसय | Jeevan sansay

    जीवन संसय ( Jeevan sansay )   जन्म की पीड़ मिटी ना प्यास बुझी, इस नश्वर तन से। अभी भी लिपटा है मन मेरा, मोह में मोक्ष को तज के।   बार बार जन्मा धरती पर, तृष्णा में लिपटी है काया। उतना ही उलझा हैं उसमें, जितना ही चाहे हैं माया।   भय बाधा को…

  • नशा | Kavita Nasha

    नशा ( Nasha ) नशा एक जलती चिता, नशे का नशा, जिस किसी को लगा, कवेलू तलक, उसके घर का बिका! नशा —— एक जलती चिता, नन्हें बच्चों का भविष्य, दांव पर लगा! घर स्वर्ग से नरक का रूप, धारण करने लगा! अन्न मिलता नहीं, तड़पते हैं बच्चे भूख से, विधवा उसकी पत्नी, लगती है…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *