Aaj aur Kal

अतीत आज और कल | Aaj aur Kal

अतीत आज और कल

( Ateet aaj aur kal ) 

 

अतीत आज और कल, बंदे संभल संभल कर चल।
परिवर्तन कुदरत का नियम, जन मन रहती हलचल।

कितना सुंदर अतीत हमारा, संस्कारों की बहे धारा।
शौर्य स्वाभिमान पराक्रम, गौरवशाली है देश हमारा।

बदल गया परिवेश आज, बदल गई है जीवनधारा।
धीर धर्म दया सब भूले, खो गया अपनापन प्यारा।

अपना उल्लू सीधा करते, बस मतलब को ही जाने।
टूट गई रिश्तो की डोरी, अपनों में ही हम हुए बेगाने।

ना जाने कल कैसा होगा, कैसी होगी वो नव प्रभात।
चमन कहीं उजड़ ना जाए, कर लो सद्भावों की बात।

चेतना की जोत जला, संस्कारों को जरा बचा लो।
भविष्य भंवर में अटका, जागो देश के नौनिहालों।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

यही है जिंदगी | Yehi hai Zindagi

Similar Posts

  • सावन फुहार | Kavita Sawan Fuhaar

    सावन फुहार ( Sawan Fuhaar ) रिमझिम जो सावन फुहार बरसी, जमीं को बुझना था फिर भी तरसी, जो बिखरीं जुल्फों मे फूटकर के, वो बूंद जैसे जमीं को तरसी, रिमझिम जो…………. हमारे हाॅथों मे हाॅथ होता, पुकार सुनकर ठहर जो जाते, बहार ऐसे न रूठ जाती, बरसते सावन का साथ पाते, अजी चमन मे…

  • कृष्ण ने लिया मनुज अवतार | Geet

    कृष्ण ने लिया मनुज अवतार ( Krishna ne liya manuj avtaar )   कारावास दिया बहना को, बढा कंस का अत्याचार। आठवां पुत्र मौत बनेगा, हो गया अब जीना दुश्वार। खुल गए सारे द्वार जेल के, सो गए सारे पहरेदार। दुष्ट कंस वध करने, कृष्ण ने लिया मनुज अवतार।   कृष्ण कंहैया नटवर नागर, तेरी…

  • भगवान के डाकिए | Bhagwan ke dakiye chhand

    भगवान के डाकिए ( Bhagwan ke dakiye )   फूलों की मस्त बहार, बहती हुई बयार। पेड़ पौधे नदी नाले, ईश्वर के डाकिए।   पशु पक्षी जीव जंतु, काले काले मेघ घने। हंसी वादियां पर्वत, ईश्वर के डाकिए।   चेहरे की चमक भी, होठों की मुस्काने सारी। दिलों की धड़कनें भी, ईश्वर के डाकिए।  …

  • नाकाम | Kavita Nakaam

    नाकाम ( Nakaam ) दुनिया की उम्मीदों पर खरा ना उतर सका मैं। ज़िंदा रहते खुद को मरा ना समझ सका मैं। अपने कद का अंदाज़ा सदा रहा मुझे। अफसोस है कि खुद से बड़ा ना बन सका मैं। एक उनके लिए, और दूसरा अपने लिए ऐसे दोहरे चरित्र का प्रहसन ना पहन सका मैं।…

  • विश्वास | Vishwas

    विश्वास ( Vishwas )    माना ,मैं कुछ नही नंदी भर हूं उनके सागर की तब भी गर्व है मुझे की उनकी इकाई तो हूं ! विश्वास है मुझे कर्म ही मंजिल है मेरी पहुचूं न पहुंचूं मुकाम तक परिणाम तो है वक्त के गर्भ मे तब भी ,गर्व है मुझे की मेरा वजूद तो…

  • जवानी का मौसम | Jawani ka Mausam

    जवानी का मौसम! ( Jawani ka mausam )    कटेगा सुकूँ से सफर धीरे -धीरे, होगी खबर उसको मगर धीरे-धीरे। मोहब्बत है जग की देखो जरुरत, उगने लगे हैं वो पर धीरे-धीरे। उबलने लगा अब अंदर का पानी, चलाएगी खंजर मगर धीरे-धीरे। आठों पहर मेरे दिल में वो रहती, लड़ेगी नजर वो मगर धीरे-धीरे। जवानी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *