उपेक्षा | Upeksha

उपेक्षा

( Upeksha  )

 

गहरी जड़ें
कारण होती हैं
आसमान में वृक्ष के
मजबूती से उठ खड़े होने में

गहरी नींव
कारण होती हैं
धरती पर घर के
मजबूती से उठ खड़े होने में

गहरी अंधेरी
कारण होती हैं
हृदय में डर के
मजबूती से उठ खड़े होने में

गहरी ख़ामोशी
कारण होती हैं
उदासी की सलाखों के
मजबूती से उठ खड़े होने में

गहरी उपेक्षा
कारण होती हैं
रिश्तों में दीवारों के
मजबूती से उठ खड़े होने में !!

 

वीरेन्द्र जैन

( नागपुर )

यह भी पढ़ें :-

विरासत | Virasat

Similar Posts

  • बड़े ख्वाब | Bade Khwaab

    बड़े ख्वाब ( Bade Khwaab ) अक्सर मैंने बड़े हीख्वाब देखे हैं,परन्तु ,बहुत से गुमनामदेखे है,ये भी देखा है,कि कहाँ ईश्वर है,कहाँ फ़कीर खाली है,मैंने उन पदचिन्हों केभी निशान देखे है।किस तरफ रूख करूँ अपना,चलने से पहले सैकड़ों सवालदेखे है।जवाब कहाँ से पाती,कहीं कोई निशान नही उनका,ये समझ आ गयाजिम्मेदारियों तलेसभी ख्वाब टूटते भी देखे…

  • रंगीन है मौसम | Rangeen hai Mausam

    रंगीन है मौसम ( Rangeen hai Mausam )   रंगीन है मौसम रंगीला है आलम फूलों से कलियों से कुछ रंग ले उधार इंतजार में तेरे मैं बैँठी तन मन संवार धीरे से हौले से चोरी से सबसे छुपते से ज़रा सा रंगवा लो खुदको थोड़ा सा रंग जाओ मुझको विरह की बदरंगियों को इँद्रधनुषी…

  • जिंदगी

    जिंदगी ** जिंदगी की समझ, जिंदगी से समझ। जिंदगी से उलझ, जिंदगी से सुलझ। अबुझ है इसकी पहेली, तेरी मेरी ये सहेली। न मिलती यह सस्ती, ऊंची है तेरी हस्ती। कभी किया करो सख्ती, जो चाहो , चलती रहे कश्ती; संभालो कायदे से गृहस्थी। धीरज धैर्य संतोष रखो, अनावश्यक लोभ से दूर रहो। बातें कम,…

  • ऐ जिंदगी | Poem ai zindagi

    ऐ जिंदगी ( Ai zindagi )   ऐ जिंदगी… कुछ देर ठहर जा बैठ जा कुछ कह जा कुछ सुन जा वक्त का तकाज़ा है कभी तू गुम है कभी मैं…   हाँफती भागती सी तुझे छूने की होड़ में थकी मांदी सी सुस्ताने के बहाने ढूँढ तलाशती तुझको ही बोझिल कमज़ोर नज़रें मेरी ऐ…

  • गुरु नमन | Guru par kavita

    गुरु नमन ( Guru Naman )   गुरु क्या मिले जिंदगी मिल गई है। सारे जहां की खुशी मिल गई है।। अनमोल मोती भरा सिंधु सारा। दमकता सूरज गुरु भाग्य सितारा।। मिले वरदहस्त किस्मत खुल गई है। गुरु क्या मिले जिंदगी मिल गई है।। अंगुली पकड़कर रास्ता दिखलाया। दुनिया का अनुभव हमें बतलाया।। जलाया ज्ञान…

  • हनुमान जयन्ती

    हनुमान जयन्ती शांति,गीत,श्रद्धा,समर्पणआदि गरिमामय जीवनऔर व्यक्तित्व सेधर्म का सुंदर समन्वयज्ञान सागर लहराने वालेआनंद के लोक में ले जाने वालेक़लम के कृति रत्न समुद्दभूतहनुमान जी को मेरा भावोंसे वंदन -अभिनंदन !शत- शत नमन ! प्रणाम !जो ज्ञाता है वहस्वयं अज्ञात है ।अज्ञात को ज्ञात करनेका प्रयत्न होना चाहिएविभिन्न माध्यमों के द्वाराक्योंकि आत्मा को भी अपनासही से…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *