Guru par kavita

गुरु नमन | Guru par kavita

गुरु नमन

( Guru Naman )

 

गुरु क्या मिले जिंदगी मिल गई है।
सारे जहां की खुशी मिल गई है।।

अनमोल मोती भरा सिंधु सारा।
दमकता सूरज गुरु भाग्य सितारा।।

मिले वरदहस्त किस्मत खुल गई है।
गुरु क्या मिले जिंदगी मिल गई है।।

अंगुली पकड़कर रास्ता दिखलाया।
दुनिया का अनुभव हमें बतलाया।।

जलाया ज्ञान दीप राहे मिल गई है।
गुरु क्या मिले जिंदगी मिल गई है।।

सदा सन्मार्ग चलने का पाठ पढ़ाया।
ऊंच-नीच का हमको जो ज्ञान कराया।।

हमे छत्रछाया विद्या दौलत मिल गई है।
गुरु क्या मिले जिंदगी मिल गई है।।

?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :- 

दिल का बहकना | Dil ka bahakna | Chhand

Similar Posts

  • कब आओगे | Kab aaoge poem in Hindi

    कब आओगे ( Kab aaoge )   वृन्दावन जस धाम जहाँ पर, जमुना जी का घाट। वहाँ  पे  राधा  देखे  आस , साँवरे  कब आओगे॥ …. शाम  से  हो गई  रात,  मुरलिया  की  ना  छेडी तान। विकल हो राधा ढूँढे आज, श्याम तुम कब आओगे॥ …. नयना  सिन्धु  समान ,  छलकता  आँखो  से  है  प्यार।…

  • लोहड़ी का त्यौहार | Lohri par Kavita

    लोहड़ी का त्यौहार ( Lohri ka tyohar )   पंजाब प्रान्त के ख़ास त्यौंहार में इसे माना जाता, पौष माह के अंतिम दिन जिसको मनाया जाता। लोहड़ी है इस पावन और पवित्र त्यौंहार का नाम, चाहें कोई कही भी रहो परन्तु उत्सव वो मनाता। भारत वर्ष की शान है ये विभिन्न तरह के त्यौंहार, कोई…

  • मुझे हक है | Poem Mujhe Haq Hai

     मुझे हक है ( Mujhe Haq Hai )   दिल के सारे राज जानूं कैसी दिल की धड़कन है। मनमंदिर में पूजन कर लूं दीपक ले मेरा मन है।   सुबह शाम जब देखूं दिल में होती धक धक है। तेरा प्रेम मेरी जिंदगी है प्रियतम मेरे मुझे हक है।   डगर डगर पे तेरे…

  • शिक्षा का महत्व | Shiksha ka mahatva par kavita

    शिक्षा का महत्व  ( Shiksha ka mahatva )   उच्च विचार अंतर्मन दौड़े, ऊंची उड़े उड़ान। प्रगति पथ पर बढ़ चले, उन्नति के सोपान।   स्वप्न सुनहरे सच हो, चले विकास की लहर। सुविधाओं से संपन्न हो, हर गांव हर शहर।   शिक्षा का सूरज दमके, निर्माण हो भरपूर। चहुमुखी विकास करें, हो हर शख्स…

  • भारत की वर्तमान दुर्दशा

    भारत की वर्तमान दुर्दशा बेरोज़गारी के अंधकार में,भटक रहे हैं युवा इस द्वार में।सपने सब कागज़ हो गए,संघर्ष के पल और गहरे हो गए। महंगाई की आग बढ़ी,हर घर की थाली सूनी पड़ी।रोटी के लिए मेहनत हार गई,सुकून की नींद अब दूर हो गई। नेताओं का गिरता स्तर,वादे बनते जुमलों का सफर।चुनावी भाषण झूठे निकले,जनता…

  • वाह भाई वाह | Wah Bhai Wah

    वाह भाई वाह ( Wah Bhai Wah )   बालपन से बनना चाहतें कवि-लेखक साहित्यकार, मन में थी उनके ऐसी आशा उसको किया साकार। तारक मेहता का उल्टा चश्मा शो से बनाएं पहचान, शैलेश लोढ़ा नाम है जिनका सपनें किया साकार।। ९ वर्ष की उम्र में जिन्होंने बाल-कवि उपनाम पाया, ये साहित्य की प्रेरणा इन्होंने…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *