उस गली से रोज़ ही मुझको गुजरना है सदा
उस गली से रोज़ ही मुझको गुजरना है सदा

उस गली से रोज़ ही मुझको गुजरना है सदा

 

( Us Gali Se Roj Hi Mujhako Gujarna Hai Sada )

 

 

उस गली से रोज़ ही मुझको गुजरना है सदा
उम्रभर उसके बिना आज़म तड़पना है सदा

 

साथ उसके माजरा ऐसा हुआ है प्यार में
सच कहूँ मैं अब मुझे उससे बिछड़ना है सदा

 

उम्रभर के तू लिए अपनें दामन में समेट ले
क्या मुहब्बत में तेरी यूं ही  बिखरना है सदा

 

इस क़दर तू बस गया दिल में  सनम मेरे मगर
दिल तुझे पाने को ही ये मेरा मचलना है सदा

 

इस तरह तुझको सनम दिल से निकाले हम भला
नाम से दिल प्यार में तेरे धड़कना है सदा

 

साथ मेरा छोड़ मत देना किसी तू राह पे
हर क़दम पे हाथ आज़म का पकड़ना है सदा

 

 

❣️

शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

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