वार्षिकोत्सव की पावन बेला पर | Varshik Utsav

वार्षिकोत्सव की पावन बेला पर

( Varshik utsav ki pawan bela par ) 

 

वार्षिकोत्सव की पावन बैला पर देते आपको बधाई,
साहित्यिक गतिविधियों में अद्वितीय सेवाऍं निभाई।
छोटे-बड़े और नऐ कलमकारों का इसने दिल जीता,
काव्य काॅर्नर फाउंडेशन की इस दिन ही नींव लगाई।।

सफ़र संघर्षों का शुरु किया आपने पाॅंच साल पहले,
धीरे-धीरे कलमकार जोड़कर काम किये भले-भले।
संस्थापिका जिसकी आदरणीया पूजा जी गंगानिया,
पीछे न देखा कभी मुड़कर सबको साथ लेकर चले।‌।

सामाजिक सेवाओं में भी आपने है परचम लहराया,
चित्रकारों से चित्र बनवाकर उनका मान भी बढ़ाया।
निर्धनों एवं गरीबों के कोरोना काल में सहायक बनें,
आज का शब्द देकर ये रचना हमसे भी लिखवाया।।

जब से काव्य कोर्नर आया मन-ही-मन में मैं हर्षाया,
ज़ुबान पर रहता एक नाम मंच संचालिका है महान।
लिखकर भेजा जब भी हमने चार लाईन का पैग़ाम,
दिया मंच ने उसको स्थान फ़ोटो के साथ दिया मान।।

वार्षिकोत्सव संग अग्रिम नूतन वर्ष की शुभकामना,
आऐ हम भी मंच पे कभी लेकर कविता कहानियाॅं।
समझो इस निकलते हुए सूरज की कोई तो भावना,
खुशियाॅं टटोल रही ज़िन्दग़ी ग़म भरी है ‌परछाइयाॅं।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

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