“वर्तमान पर निर्भर है भविष्य”
“अभी तेरे बारे में ही बात चल रही थी। 42 साल की उम्र में भी हम चारों में सबसे बेहतर स्वास्थ्य तेरा है, तेरा पेट भी अंदर है। कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकेगा कि तेरी उम्र 41 वर्ष हो चुकी है। सब लोग ज्यादा से ज्यादा तुझे 30 वर्ष का ही बोलेंगे। इतना फिट है तू।” प्रभात को सामने से आता देखकर अभिनव बोला।
“आप जैसे दोस्तों की दुआओं का असर है। आपका प्यार, अपनापन और परवाह मुझे हमेशा जवां बनाए रखती है।” प्रभात ने जवाब दिया।
“ये सब तो कहने की बातें हैं। तुम्हारा खानपीन का शेड्यूल बहुत अच्छा है। सुबह जल्दी उठना, टहलने जाना, जल्दी खाना और रात का खाना भी शाम 6:00 बजे से पहले खा लेना… ताकि सोने के समय तक खाना पच जाए। यह सब हमसे नहीं हो पाता। हम अगर जल्दी खाना खा लेते हैं तो रात को भूख लगती है। जब तक रात में उठकर एक बार खाना फिर से ना खा लें, तब तक नींद भी नहीं आती।” राजीव बोला।
“प्रभात तुझे देखकर, तेरी फिटनेस देखकर लगता है कि तू हम सबसे ज्यादा जिएगा। मुझे लगता है कि 90 वर्ष की उम्र में भी तुझे किसी सहारे की जरूरत ना पड़ेगी।” अब बोलने की बारी अशोक की थी।
“भाई लोगों, जिंदगी का कुछ भरोसा नहीं। कब, कहाँ, क्या हो जाए? कोई नहीं जानता। हमारा शरीर भी नश्वर है, लेकिन अपने शरीर का, स्वास्थ्य का ध्यान हम रख सकते हैं। पौष्टिकता से भरपूर खाना खाकर, दुर्व्यसनों जैसे शराब, सिगरेट, गुटखों से दूर होकर और शरीर की स्वच्छता आदि का ध्यान रखकर हम इसकी उम्र बढ़ा सकते हैं। एक न एक दिन यह शरीर भी नष्ट हो ही जाना है।
यह भी सत्य है कि जीते जी कोई साथ नहीं देता। सिर्फ शरीर ही अंतिम समय तक साथ देता है। हर दर्द हमें स्वयं ही सहना पड़ेगा। लोग हमकों दवा दे देंगे, पानी दे देंगे लेकिन हमारी पीड़ा सिर्फ हम ही महसूस कर सकेंगे। अतः दूसरों पर आश्रित होने से अच्छा है कि हम संतुलित आहार सही समय पर लें और जो खाएं उसको पचायें भी।
सबसे महत्वपूर्ण बात… सकारात्मक लोगों के साथ रहे और खुश रहें। अगर ऐसा करेंगे तो हम सब की उम्र भी बढ़ जाएगी। जवानी फिर से लौट आयेगी। सभी के चेहरे मोहरे अपनी वास्तविक उम्र से कम के दिखाई देंगे। चेहरे पर ताजगी दिखाई देगी।” प्रभात ने अपनी फिटनेस का राज बताते हुए कहा।
“यह सब तो ठीक है लेकिन तुम 90 वर्ष से कम ना जिओगे। चाहो तो लिख कर रख लो।” अशोक फिर से उम्र का जिक्र छेड़ बैठा।
“बेटा, मैं तेरी बातों में आने वाला नहीं हूँ और न ही तेरी ऐसी बातों से खुश होने वाला हूँ। याद रखना, तेरी बातों से मैं अपनी दिनचर्या नहीं बदलने वाला। तेरी बातों से मुझे बबलू और ज्योतिषी की बात याद आ रही है।” प्रभात पुरानी घटना के बारे में सोचकर बोला।
“कौन सी बात? ज्योतिषी से हमारी बात का क्या मतलब?” अशोक ने सवाल किया।
“बिल्कुल मतलब है। बताता हूँ… अब से 20 साल पहले एक दिन, ग्रेजुएशन कर रहा मेरा दोस्त बबलू जब एक ज्योतिषी से मिलने पहुंचा। ज्योतिषी ने उसका हाथ देखकर भविष्यवाणी की कि बहुत जल्द ही, अगले 6 माह के अंदर ही उसकी सरकारी नौकरी लग जाएगी।
इससे पहले भी बबलू कई बार उस ज्योतिष के पास जा चुका था। हर बार ज्योतिषी का आकलन/भविष्यवाणी बिल्कुल सटीक निकली थी। इस बार जब ज्योतिषी ने कहा कि बहुत जल्द उसकी सरकारी नौकरी लगने वाली है तो उसको यकीन हो गया।
इसके पीछे कारण यह था कि उसने चार सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म डाल रखे थे और अगले एक दो महीना में उनके एग्जाम होने थे। बबलू उन परीक्षाओं को ध्यान में रखकर परीक्षा तैयारी भी कर रहा था। इस बार भी ज्योतिषी की बात सुनकर उसे यकीन हो गया कि हंड्रेड परसेंट उसकी सरकारी नौकरी लगी जाएगी।
अति आत्मविश्वासी होकर उसने अपनी तैयारी में ढील डाल दी। इसका नतीजा यह रहा कि उसका किसी प्रतियोगी परीक्षा में सलेक्शन ना हो पाया। इसके बाद बबलू ने बहुत सी सरकारी नौकरियों के एग्जाम दिए लेकिन ज्योतिषी के चक्कर मे हर बार पड़कर वह अपनी मेहनत में कमी जरूर कर देता।
आज तक बबलू की सरकारी नौकरी लग न सकी। ऐसा नहीं था कि बबलू में काबिलियत न थी। बात यह थी कि बबलू किसी से भी थोड़ी तारीफ़ सुनकर अपनी कोशिशों में कमी कर देता था। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए था। बबलू के साथ वाले सभी लड़के अच्छी जगह सेटल हो गए। वर्तमान में वह एक साइबर कैफ़े चलाता है।” प्रभात ने बताया।
“इस कहानी का मतलब समझ में ना आया। यहाँ यह कहानी सुनाने के पीछे तेरा क्या इरादा था?” प्रभात से अभिनव ने सवाल किया।
“इसका सीधा सा मतलब है कि मैं तुम्हारी चिकनी चुपड़ी बातों से खुश होकर, अपनी दिनचर्या से… खान-पीन से समझौता नहीं करने वाला। मैं वह गलती बिल्कुल नहीं करूंगा, जो बबलू ने की थी। अगर बबलू उस समय ज्योतिषी की बातों से प्रभावित हुए बिना, अपनी पढ़ाई मन लगाकर मेहनत से, ईमानदारी से पूरी करता तो आज उसकी स्थिति बिल्कुल अलग होती। हमेशा इंसान को अच्छी या बुरी बातों से प्रभावित हुए बिना अपने कर्म करते रहना चाहिए।
ज्यादा खुश होकर या ज्यादा दुखी होकर अपने लक्ष्य से भटकना ठीक नहीं होता। हमारा भविष्य वर्तमान पर निर्भर करता है। कोई यह नहीं कह सकता कि हम कितना जिएंगे। अगर मैं तुम सब की बातों से खुश होकर अपनी दिनचर्या बदल लूंगा, या अपने खान-पान में ढील डाल दूंगा तो यह मुझसे बिल्कुल नहीं होगा। अगर मैंनें ऐसा किया तो… कुछ ही महीना में मेरी शारीरिक स्थिति बिल्कुल अलग होगी।
आज तक की मेरी शरीर पर की गई मेहनत… सब बेकार हो जायगी। मैं भी अपने शरीर का नाश कर लूंगा, बेडौल दिखने लगूंगा और अपनी उम्र से ज्यादा दिखने लगूंगा। मेरा पेट भी तुम लोगों की तरह बाहर निकल आएगा।”
“हाँ, यह बात तो सच है कि हमारे वर्तमान पर ही हमारा भविष्य निर्भर करता है। हम सब इससे सहमत हैं।” राजीव बोला।
“अगर मेरी बातों से तुम सब सहमत हो तो क्यों ना तुम भी मेरी तरह अपनी दिनचर्या बनाने की कोशिश करो? खानपान का ध्यान रखो। फिर देखना, कुछ ही समय में तुम्हारा पेट भी अंदर होगा। तुम्हारी उम्र भी समय रहते ठहर जाएगी। तुम सब खुद में बेहतर व अच्छा महसूस करोगे। फिर से तुम लोगों की जवानी लौट आएगी।” प्रभात ने मसखरी करने की कोशिश की।
“अच्छा बेटे, तूने अपनी कम उम्र का सीक्रेट बताकर अच्छा नहीं किया। उस पर अमल करके, अब हम दिखने में, तुझसे भी कम उम्र का बनकर दिखाएंगे।”
अभिनव, राजीव व अशोक ने भी मजाक करते हुए एक सुर में कहा।
प्रभात उन तीनों के इस तरह, एक साथ बोलने से मुस्कुरा उठा।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा
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