Waqt ka pahiya

वक़्त का पहिया | Waqt ka Pahiya

वक़्त का पहिया

( Waqt ka pahiya )

 

वक्त का पहिया कभी न रूकता ये चलता ही रहता,
सर्दी-गर्मी ऑंधी तूफ़ान यह बारिश में नहीं थकता।
मेहनत करनें वालों को सदा मिलती यही सफ़लता,
जिसमें है ये चार गुण वह हर दिल पर राज करता।।

सबको आदर देता हो व विनम्रतापूर्वक बात करता,
माफ़ी मांगना, माफ़ करना व शुक्रिया अदा करता।
दोनों की समझदारी से चलता है सबका यह रिश्ता,
नहीं धोखा नहीं दग़ाबाज़ी ऐसे काम जो ना करता।।

हार-जीत एवं विकास-विनाश यह चलता ही रहता,
दान-पुण्य का पारितोषिक सबको बराबर मिलता।
सच की राह पर जो चलता वो अमन चैन से जीता,
भीड़ से हटकर जो भी चलता पथ नया बना लेता।।

क्या से क्या हो जाता है जब समय यह है पलटता,
ग़रीब अमीर व अमीर ग़रीब बनते वक्त ना लगता।
लड़कर हारना ठीक है यू-हार मान लेना ठीक नहीं,
जो वक्त गुजर जाता वह कभी लौटकर ना आता।।

किस्मत बदले या ना बदले वक्त सबका बदलता है,
विश्वास एवम लक्ष्य रखें वह जीवन संवार लेता है।
असंभव कार्य को वही व्यक्ति सम्भव में बदलता है,
संकल्पों पर अडिग रहें वही हालात बदल देता है।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

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