यादों की चुभन

यादों की चुभन | Yaadon ki Chubhan

यादों की चुभन

( Yaadon ki Chubhan )

आज फिर तेरी यादों का समंदर उमड़ आया है,
हर लहर ने बस तेरा ही अक्स दिखाया है।
दिल जैसे टूटकर बिखर रहा हो अंदर-अंदर,
तेरे बिना इस मन ने हर पल ख़ुद को पराया पाया है।

हर आह में तेरा नाम ही सिसकता है,
आँसुओं में बसा तेरा चेहरा ही चमकता है।
रोते हुए दिल को यही सवाल सताता है,
क्यों तू दूर है, क्यों तू लौटकर नहीं आता है?

तेरी यादों ने आज फिर से घेर लिया है,
दिल ने फिर से तेरे लौटने का सपना संजोया है।
पर सच ये है कि तू है बहुत दूर,
और मेरे मन ने तेरी कमी में ख़ुद को मजबूर पाया है।

*की लौट आओ*, अब नहीं रहा जा रहा,
आज फिर तेरी यादों का समंदर उमड़ आया है,
हर लहर ने बस तेरा ही अक्स दिखाया है।

प्रेम ठक्कर “दिकुप्रेमी”

यह भी पढ़ें :-

प्रेम का उद्देश्य : अडिग इंतज़ार अपनी दिकु का

Similar Posts

  • राम दरबार | Kavita

    राम दरबार ( Ram darbar )   अमरावती  पृथ्वी  पे  जैसे, इन्द्र का दरबार। अद्भुत सुहाना सरस हो, श्रीराम का दरबार।   भवहीन तन आनंद मन,सौन्दर्य नयनभिराम, श्रीराम का मन्दिर जहाँ, मन जाए बारम्बार।   साकेत दमके पुनः पथ, दर्पण का हो एहसास। श्रीराम जी आए है जैसै, तन में थम गयी सांस।   तोरण…

  • Chhodo Kal Ki Baatein | Kavita -छोड़ो कल की बातें

    छोड़ो कल की बातें ( Chhodo Kal Ki Baatein )   छोड़ो कल की बातें जल्दी से संभालो अपना आज; क्योंकि इसी में छिपे हैं- तुम्हारी सफलता के सारे राज छोड़ो कल की बातें ।   कल क्या हुआ, कल क्या होगा इसकी क्यों करते हो फ़िक्र ? वर्तमान में जो लक्ष्य दिखता उस तक…

  • बढ़े सौरभ प्रज्ञान | Badhe Saurabh Pragyan

    बढ़े सौरभ प्रज्ञान ( Badhe Saurabh Pragyan ) जन्मदिन की बधाइयाँ, करें पुत्र स्वीकार।है सबकी शुभकामना, खुशियाँ मिले हजार।। बहुत-बहुत शुभकामना, तुमको प्रियवर आज।हो प्रशस्त जीवन सुखद, सुन्दर साज समाज।। जीवन भर मिलती रहें, खुशियाँ सदा अपार।मात शारदे! आपके, भरें ज्ञान भण्डार।। शुभ सरिता बहती रहे, जीवन हो सत्संग।घर आँगन खिलते रहें, प्रेम प्रीति के…

  • नया साल | Naya Saal Kavita

    नया साल ( Naya saal )   नए साल का स्वागत है नया साल अब आगत है   कोई सपनों का दीप जलाए कोई अपनों को पास बुलाए कोई सोवत कोई जागत है नए साल का स्वागत है   साल पुराना था दु:खदाई बहुत करोना किया तबाही नया सुखी कुछ लागत है नए साल का…

  • ना नशा करो ना करने दो | Nasha par kavita

    ना नशा करो ना करने दो ( Na nasha karo na karne do )   नशा करो ना करने दो समझा दो सबको प्यार से क्यों मौत को गले लगाते क्यों खेल रहे अंगार से   जूझ रहे जो पड़े मौत से हाल जरा जाकर देखो टीबी कैंसर का कारण है गुटखा जर्दा सब फेंको…

  • अटल के इरादे

    अटल के इरादे टलना मैंने सीखा नहीं,जिगर शेर-सा मैं रखता हूं।कायर नहीं जो पीठ दिखाऊं,अटल इरादे मैं रखता हूं।। प्रहरी हूं मैं भारतवर्ष का,तन हिमालय-सा मैं रखता हूं।तूफानों से ना कोई डर मुझे,अटल इरादे मैं रखता हूं।। सत्य,अहिंसा,शांति का,मूलमंत्र स्वीकार मैं करता हूं।मानवता की राह चलने का,अटल इरादे मैं रखता हूं।। शत्रु की सांसे मैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *