मोहन सी प्रीति

मोहन सी प्रीति | Kavita Mohan see Preeti

मोहन सी प्रीति

( Mohan see Preeti )

मन का भोलापन कैसे बताए,
कभी खिला-खिला कभी मुरझाए।

कहता नहीं फिर भी कहना चाहे,
बिन जाने सुने तर्कसंगत बन जाए।

गम का छांव लिपटस सा लिपट ले,
तो अनमना मन कभी रूदन को चुन ले।

संघर्ष से डरता नहीं फिर भी अग्रसर नहीं,
तूफानो से भिड़ता पर विचार करता नहीं ।

कभी खुशी में झूम-झूमकर इतराए,
नाचे गाये उत्साहित हो जोश जगाए ।

मन भी कमाल का व्यक्तित्व रखता है,
कभी सलाह देता कभी सहयोग चाहता है।

चीखकर अवचेतन सा गुमसुम गम्भीर,
कभी चित्त चितवन भजन-कीर्तन धीर।।

मन खुश तो जीवन सुखद महसूस,
मन अशांत जीवन दुखीराम मनहूस।

मन को सदा प्रभावित प्रसन्न रखिए,
जीवन सफल, धड़कन में प्रेम रखिए ।

प्रतिदिन अर्चन और करो ऊँ जाप,
मोहन सी प्रीति हो कट जाए ताप ।

प्रतिभा पाण्डेय “प्रति”
चेन्नई

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