Ye mohabbat ki duniya

ये मोहब्बत की दुनिया | Ye mohabbat ki duniya

ये मोहब्बत की दुनिया

( Ye mohabbat ki duniya )

 

सोनू रब से मुझे कुछ भी नहीं बस तेरी मोहब्बत चाहिए

मेरे बुझे हुए  दिल में तुमने मोहब्बत के दीप को जलाया

भावनाओं को भरकर अपनी मोहब्बत का जादू चलाया

मोहब्बत में मैंने सब हारना चाहा मगर सब कुछ है पाया

 

तुम मोहब्बत की दरिया हो मोहब्बत की प्यास बुझाओ

मोहब्बत की पावन धारा बनकर मोहब्बत का आशियाँ दो

निराकार ब्रह्म की जैसी रूप मोहब्बत का साकार रूप दो

 

मोहब्बत कैसा है ये नहीं जानता मेरे जीवन की तकदीर हो

मैं अनजाना सफर का राही बन जाओ तुम मेरे हमसफ़र हो

नफरतों के इस जहां में बस तुम मोहब्बत की देवी हो

 

कंटकमय जीवन के पथ में मोहब्बत के फूल बिछा दूँ

जीवन से सारे दुःख हर कर लूं हमदर्द की दवा बना दूँ

मोहब्बत के आकर्षण में बहोत हैं आ सच्ची मोहब्बत दूँ

 

रंग हीन जीवन पथ में मोहब्बत की दुनिया बनाएं

बिछड़े हुए हम खुद से आ मोहब्बत की बारिश बन जाएं

वादा है तुमसे मेरा राहें जो भी हो मंजिल एक ही बनाएं

 

काल्पनिक मोह्हबत की रब में हम हकीकत बन जाएं

ऐ जान-ए-तमन्ना डर का बन्धन तोड़ एक बन जाएं

तोड़कर सारे नफ़रतें हम मोहब्बत की दुनिया बसाए

 

🍂

मन की बातें

कवि : राजेन्द्र कुमार पाण्डेय   “ राज 

प्राचार्य
सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,
बागबाहरा, जिला-महासमुन्द ( छत्तीसगढ़ )
पिनकोड-496499

यह भी पढ़ें :-

मन के मीत | Man ke meet kavita

Similar Posts

  • भैया दूज | Bhaiya Dooj Geet

    भैया दूज ( Bhaiya Dooj )   पावन रिश्तो का संसार बरसे भाई बहन का प्यार। भैया दूज आया त्यौहार लाया हर्ष खुशी अपार। पावन रिश्तो का संसार   चंदन तिलक लगा मस्तक बहना करे मंगलाचार। सुख वैभव से भरा रहे भैया तेरा घर परिवार। उमड़ा दिलों में हर्ष अपार भैया लाए ढेरों उपहार। भाई…

  • क्या हम आजाद हैं | Kya Hum Azad Hain

    क्या हम आजाद हैं कहने को आज़ाद तो कहलाते हैं, पर आज़ाद रह नहीं पाते हैं। कोई गुलाम जातिवाद का, कोई राजनीति के गुलाम बन जाते हैं। साम्प्रदायिकता और दलों के फेर में, बंधकर हम रह जाते हैं। अन्याय और अत्याचार सह सहकर, यूं ही घुटकर रह जाते हैं। आज भी देश में दहेज प्रथा,…

  • मां दुर्गे कालरात्रि | Maa Durge Kalratri

    मां दुर्गे कालरात्रि ( Maa Durge Kalratri )   रूप विकराल रुद्र श्रृंगार, उरस्थ मृदुल मंगल धार मां दुर्गे कालरात्रि आभा, अद्भुत अनुपम मनोहारी । सघन तिमिर सम वर्णा दर्शन, साधक जन अति शुभकारी । संपूर्ण ब्रह्मांड सिद्धि वृष्टि, सर्वत्र खुशियां आनंद बहार । रूप विकराल रुद्र श्रृंगार, उरस्थ मृदुल मंगल धार ।। महायोगीश्वरी महायोगिनी…

  • पाज़िटिव कविता! | Vyang

    पाज़िटिव कविता! ( Positive Kavita : Vyang )   कोरोना नहीं है कोरोना नहीं है रोना नहीं है रोना नहीं है आॅक्सीजन की कमी नहीं है फैक्ट्रियों में पड़ी हुई हैं बहुत सारी भरी हुई हैं टैंकरों से आ रही है हवाई जहाज भी ला रही है बेड की कमी नहीं है दवाएं भी हैं…

  • देश अब तुम्हें पुकारे

    देश अब तुम्हें पुकारे वापस आओ देश के लालोदेश अब तुम्हें पुकारेदेखो हाल इस धरती काजो तुम कर गए हमारे हवालेवापस आओ देश के लालोदेश अब तुम्हें पुकारे भूल गए सब तुम्हारी कुर्बानीलहू तुम्हारा बहा कटे हाथ और पैरमां बहन पत्नी और बेटीरोती थी तब घर में अकेलीवापस आओ देश के लालोदेश अब तुम्हें पुकारे…

  • मै अयोध्या हूं | Kavita Main Ayodhya Hoon

    मै अयोध्या हूं ( Main Ayodhya Hoon )   जम्बू द्वीप में जलते दीये आर्यावर्त की चमकती आभा बहते सरयू की निर्मल धारा मैं अयोध्या हूं ! स्कंद पुराण की कथा सुनाती रघुवंशियों की राजधानी होती प्रभु राम की जन्मभूमि बताती मैं ,,,,,,,,,,,,,,,,,,, ! सदियों से यातनाएं सहती बर्बर बाबर का विध्वंश झेलती न्याय मंडलों…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *