युवा शक्ति की प्रेरणा

युवा शक्ति की प्रेरणा

युवा शक्ति की प्रेरणा

विश्व पटल पर आपसे, बढ़ा देश का मान।
युवा विवेकानंद थे, भारत का अभिमान॥

युवा विवेकानन्द नें, दी अद्भुत पहचान।
युवा शक्ति की प्रेरणा, करे विश्व गुणगान॥

जाकर देश विदेश में, दिया यही संदेश।
धर्म, कर्म अध्यात्म का, मेरा भारत देश॥

अखिल विश्व में है किया, हिन्दी का उत्कर्ष।
हिंदी भाषा श्रेष्ठ है, है गौरव, है हर्ष॥

श्रेष्ठ हमारी सभ्यता, है संस्कृति महान।
श्रेष्ठ हमारे आचरण, श्रेष्ठ हमारा ज्ञान॥

लक्ष्य प्राप्ति हित अनवरत, करो सदा संघर्ष।
युवा शक्ति हो संघटित, ख़ूब करे उत्कर्ष॥

आलोकित पथ को करे, भाव भरे अनमोल।
नमन विवेकानंद को, करे सभी दिल खोल॥

परम हंस से सीखकर, बने विवेकानंद।
पाकर सौरभ प्रेरणा, खिले हृदय मकरंद॥

डॉo सत्यवान सौरभ

कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,
333, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी,
हरियाणा

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • जीवन की आधारशिला | Poem jeevan ki aadharshila

    जीवन की आधारशिला ( Jeevan ki aadharshila )     सत्य सादगी सदाचार है जीवन की आधारशिला। सद्भाव प्रेम से खिलता हमको प्यारा चमन मिला।   पावन पुनीत संस्कार ही संस्कृति सिरमौर बने। सत्य शील आचरणों में मानवता के जो गहने।   जब दिलों में प्रेम बरसता चेहरों पर मुस्काने हो। राष्ट्रप्रेम की अलख जगाते…

  • मदिरालय | Madiralay par Kavita

    मदिरालय ( Madiralay )    पड़ा धुत नशे में राही मदिरालय को जाता। लड़खड़ाती जिंदगी है समझ नहीं वो पाता। मय प्याला हाथों में छलके जामो पे जाम। ये कैसी दीवानगी छाई घर हो जाए नीलाम। बेखुदी में रह बेसुध है मधुशाला को जाए। पीने वाले पी रहे हैं हाला हाला मद भाए। सोमरस सुधारस…

  • हिन्दुस्तान को जगाओ | Kavita Hindustan ko Jagao

    हिन्दुस्तान को जगाओ ( Hindustan ko Jagao ) हम कुम्भ की भाँति सो रहे हैं, बाहरी आकर हमें टटोल रहे हैं, हम खुशी का सपना देख रहे हैं, बाहरी कारोबार को बटोर रहे हैं, हम हिन्दू हिन्दी में खुश हो रहे हैं! बाहरी हिन्दुस्तान को लपेट रहे हैं। हम मात्र दो बच्चों में बस कर…

  • जनकवि अदम गोंडवी

    जनकवि अदम गोंडवी मैं प्रणाम, वंदन,नमन का चंदन आपको बार-बार हर बार करता हूं,स्मृति में रहो आप हमारे और जग के,यही प्रयत्न मैं हर बार करता हूं।मन को झकझोरती आपकी कविता, जग को दिखाई राह सच्चाई लेखनी से,जन कवि अदम गोंडवी जी को मैं साष्टांग दंडवत प्रणाम करता हूं।। गरीबी को बताई सच्चाई लाज तेरी,…

  • अभी है वक्त | Abhi Hai Waqt

    अभी है वक्त ( Abhi hai waqt )   खौल उठना है खून ,जब देती है दिखाई नग्न ता वह सोच की हो या परिधान की या हो डूबती संस्कृति और सभ्यता पुरखों से मिली धरोहर को निगल रही यह आधुनिकता पुरुषत्व हीन हो रही नव पीढ़ी गांजा चरस अफीम की विविधता शर्म , लाज,…

  • जगजननी जानकी | Kavita Jag Janani Janaki

    जगजननी जानकी ( Jag Janani Janaki )   अपने चरित्र और चिंतन से नारी जीवन के दर्शन दिखलाइए, विपदाओं से घिरी जानकी ने कुल की मर्यादा को बतलाया ।। जिस धोबी ने स्त्री को करके कलंकित घर से निकाला था, माता की हर भाव को पीड़ा में देख वह भी बहुत पछताया था।। समझ लेता…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *