ज़िंदगी को वो जहन्नुम ही बनाएगा

ज़िंदगी को वो जहन्नुम ही बनाएगा

ज़िंदगी को वो जहन्नुम ही बनाएगा

ज़िंदगी में फूल को जो भी सताएगा
ज़िंदगी को वो जहन्नुम ही बनाएगा

तू डराना चाहता है मौत को प्यारे
ये बता तू मौत को कैसे डराएगा

बावली सी हो गयी मैं जानकर ये की
आज बेटा शौक से खाना पकाएगा

मानता हूं तू बहुत नाराज़ है लेकिन
भाई के बिन जश्न तू कैसे मनाएगा

वो बहुत ही हंँसमुखा इंसान है यारों
मौत को हंँसकर गले से वो लगाएगा

कुमार अहमदाबादी

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • नये रंग भरने वाला था | Ghazal Naye Rang

    नये रंग भरने वाला था ( Naye Rang Bharne Wala Tha ) हमारा जाम मुहब्बत से भरने वाला था कोई उमीद की हद से गुज़रने वाला था जवाब उस से मुहब्बत का किस तरह मिलता वो गुफ़्तगू भी सवालों में करने वाला था ये एक बात ही ज़ाहिर है उसकी आंँखों से ज़रा सी देर…

  • बहुत बेचैन हूँ | Ghazal Bahut Bechain Hoon

    बहुत बेचैन हूँ ( Bahut Bechain Hoon ) सुकूँ दिल में यहाँ रहता नहीं है? ख़ुशी का जब यहाँ साया नहीं है बहुत बेचैन हूँ उसके लिये मैं अभी तक शहर से लौटा नहीं है उसे मैं कह सकूं कुछ बात दिल की मुझे वो राह में मिलता नहीं है उसे गुल देखकर पचता रहा…

  • कितने | Kitne

    कितने ( Kitne )    पेड़ों से पत्ते बिछड़ गये कितने इस जग उपवन से उजड़ गये कितने सारा दिन अब ये चला रहे हैं फ़ोन इस युग के बच्चे बिगड़ गये कितने पहले हर कोई,गुनाहों से था दूर इस पथ को अब तो पकड़ गये कितने सबकी फ़रियादें,कहाँ सुनेगा रब इस दर पर माथा…

  • पानी पानी हर तरफ़

    पानी पानी हर तरफ़ दिख रहा है आज हमको पानी पानी हर तरफ़कर रहा है ख़ूब बादल मेहरबानी हर तरफ़ बेतकल्लुफ़ होके दोनों मिल न पाये इसलिएबज़्म में बैठे थे मेरे खानदानी हर तरफ़ तोड़कर वो बंदिशें वादा निभाने आ गयाकर रहे थे लोग जब के पासबानी हर तरफ तेरे जैसा दूसरा पाया नहीं हमने…

  • घर की इज़्ज़त | Ghazal Ghar ki Izzat

    घर की इज़्ज़त ( Ghar ki Izzat )   यह हुनर दिल में ढाल कर रखना घर की इज़्ज़त सँभाल कर रखना हर तरफ़ हैं तमाशबीन यहाँ कोई परदा भी डाल कर रखना मैं भी दिल में तुम्हारे रहता हूँ अपने दिल को सँभाल कर रखना हर ग़ज़ल अंजुमन में छा जाये दर्द दिल का…

  • लापता कर गया | Ghazal Shayari

    लापता कर गया ( Laapata kar gaya )   तंज़ के तीर सारे चला कर गया। है बिछड़ के बहुत ख़ुश बता कर गया। ज़ख़्म फिर से हमारा हरा हो गया कौन उसका यहां तज़किरा कर गया। दी रिहाई हमें इश्क़ की क़ैद से ख़त्म वो प्यार का सिलसिला कर गया। तोड़ कर दिल हमारा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *