Ghazal Majboor

मज़बूर | Ghazal Majboor

मज़बूर

( Majboor )

जिस्म से तो नहीं, सोच से मा’ज़ूर हुए हम,
आख़िर नफ्स के आगे क्यों मज़बूर हुए हम,

इन दुनियावी आसाईशों से, यूँ मुतासिर हुए,
कि…..अपने रब्बे-इलाही से ही दूर हुए हम,

आख़िर क्यों ख़ुशियाँ दस्तक देगी दर पे मेरे,
कि..खुद ही ग़मों के अंधेरे से बे-नूर हुए हम,

रोज़ शाम से ही इंतज़ार की शमा जला लेते,
उसके न आने से रोज़ ज़ख़्म से चूर हुए हम,

खुद ही खुदके ख़्वाहिशों का गला घोंट दिए,
फिर बताओ कैसे खुद के बेकसूर हुए हम??

Aash Hamd

आश हम्द

( पटना )

यह भी पढ़ें :-

साथ के पल | Ghazal Saath ke Pal

Similar Posts

  • चाहता हूँ | Chahta Hoon

    चाहता हूँ ( Chahta Hoon ) माँग तेरी मैं सज़ाना चाहता हूँहाँ तुझे अपना बनाना चाहता हूँ राह उल्फ़त की बनाना चाहता हूँप्यार हर दिल में बसाना चाहता हूँ आप बिन तो इस जहाँ में कुछ नही हैबात मिलकर ये बताना चाहता हूँ दो कदम जो साथ मेरे तुम चलो तोइक़ नई दुनिया दिखाना चाहता…

  • हर लम्हा है हसीन | Ghazal Har Lamha

    मेरी ग़ज़ल ( Meri Ghazal ) मिलती सभी से मेरी ग़ज़ल दिलकशी के साथ शीरीं ज़ुबां है उसकी बड़ी चासनी के साथ हम जीते ज़िंदगी को हैं दरियादिली के साथ हर लम्हा है हसीन फ़क़त मैकशी के साथ बातें करेंगे वस्ल की और इंतिज़ार की इक़रार-ए-इश्क़ की सदा संजीदगी के साथ बीती सुख़नवरी में ही…

  • सर्द पड़े रिश्ते | Sard Pade Rishte

    सर्द पड़े रिश्ते ( Sard Pade Rishte ) सर्द पड़े इन रिश्तों को,फ़िर गर्माना , ज़रूरी है । सोये हुए एहसासों को ,फ़िर जगाना , ज़रूरी है । दिल में उभरे इन भावों को ,बाहर लाना , ज़रूरी है । रिश्तों में घुली जो कड़वाहट ,उसका भी अन्त ज़रूरी है । मन में बैठी पीड़ाओं…

  • है तेरी रहमत ग़ज़ब | Hai Teri Rahmat Gazab

    है तेरी रहमत ग़ज़ब ( Hai teri rahmat gazab )   है गज़ब की शान तेरी है तेरी रहमत गज़ब मेंरे मौला तेरी अज़मत है तेरी ताकत ग़जब। है अजब ये बात की मैं उफ़ भी कर दूं तो क़हर और उससे क़त्ल होकर भी मिले राहत ग़जब। दे रहा था हक़ मेरा मुझको मगर…

  • ज़िन्दगी खत्म हुई | Poem Zindagi Khatam hui

    ज़िन्दगी खत्म हुई ( Zindagi khatam hui )    जिंदगी खत्म हुई उन्हें पुकारते हुए उनको जीतते हुए हमको हारते हुए क़ौल वो क़रार जो उन्हें तो याद भी नहीं बस उसी क़रार पर उमर गुज़ारते हुए । चार दिन के प्यार का चढ़ा हुआ जो कर्ज़ था हाथ कुछ बचा नहीं उसे उतारते हुए।…

  • रो दिये | Sad Ghazal in Hindi

    रो दिये ( Ro Diye)   जो हमारी जान था जिसपे फ़िदा ये दिल हुआ जब हुआ वो ग़ैर का सब कुछ लुटाकर रो दिये। है अकड़ किस बात की ये तो ज़रा बतलाइये वक्त के आगे यहां रुस्तम सिकंदर रो दिये। फख़्र था मुझको बहुत उनकी मुहब्बत पर मगर जब घुसाया पीठ में इस…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *