हिज़्र भी वस्ल सा लगा है ये

हिज़्र भी वस्ल सा लगा है ये

इक नया तजरिबा हुआ है ये
हिज़्र भी वस्ल सा लगा है ये

अश्कों को भी समेट कर रखता
लोग कहते हैं मसख़रा है ये

वास्ते तेरे बस ग़ज़ल कहते
इस सुख़न -साजी ने किया है ये

दाल रोटी के रोज़ चक्कर में
इश्क़ तो अब हुआ हवा है ये

गुम तो.होशो-ख़िरद हुए हैं अब
प्यार करने का फ़लसफ़ा है ये

लफ़्ज़ों का खेल काग़ज़ों में बस
जाँ लुटा के भी क्या मिला है ये

कोई सूरत नहीं है बचने की
क़ैद से अब हुआ रिहा है ये

लुत्फ़ बस मीर की ग़ज़ल का लो
बस उसी का ही क़ाफ़िया है ये

दलबदल करते रोज़ हैं नेता
सब सियासत का पैंतरा है ये

बैठे दामन पसार के मीना
इश्क़ में अब तो इंतिहा है ये

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • पर तू बदल गया | Par tu Badal Gaya

    पर तू बदल गया ( Par tu Badal Gaya ) मौसम विसाले यार का फिर से निकल गयामैं तो वहीं खड़ी रही पर तू बदल गया मिसरे मेरे वही रहे मौज़ूं फिसल गयामेरी ग़ज़ल पे तेरा ही जादू जो चल गया ममनून हूँ सनम मैं करूँ शायरी नईनज़रों पे मेरी तीर मुहब्बत का चल गया…

  • अपना लिया बेगाने को | Ghazal Apna Liya

    अपना लिया बेगाने को ( Ghazal Apna Liya Begane ko ) मैंने देखा है न बोतल को न पैमाने को शैख आते हैं मगर रोज़ ही समझाने को जाम पर जाम दिये जायेगी जब उनकी नज़र कौन जा सकता है इस हाल में मैख़ाने को निकहत-ओ-नूर में डूबी हुई पुरक़ैफ फ़िज़ा इक नया रंग सा…

  • याद रहेगा | Yaad Rahega

    याद रहेगा ( Yaad Rahega ) गुज़रा जहाँ बचपन वो मकाँ याद रहेगाहमको वो मुहब्बत का जहाँ याद रहेगा नायाब जो इक़रार किया इश्क़ का तुमनेइन आँखों को हरदम वही हाँ याद रहेगा इस शह्र ने दी है हमें दो वक़्त की रोटीया रब ये मेरा रोज़ी – रसाँ याद रहेगा हम भूल भी जाएँगे…

  • मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैं

    मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैं मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैंलगा के ताज को ठोकर खड़े हैं न थामा हाथ भी बढ़कर किसी नेयूँ तन्हा हम शिकस्ता-तर खड़े हैं करूँ कैसे तुम्हारा मैं नज़ाराज़माने में सौ दीदा-वर खड़े हैं शजर आता न कोई भी नज़र अबबशर सब धूप में थक -कर खड़े हैं मिरे ज़हनो गुमाँ…

  • दर्द में भी मुस्कराना चाहिए

    दर्द में भी मुस्कराना चाहिए हर खुशी को गुन गुनाना चाहिएदर्द में भी मुस्कराना चाहिए जो पड़ी बंजर हमारी भूमि हैअब वहां फसलें उगाना चाहिए तुम नहीं भागो नगर की ओर अबगाँव में मिलकर सजाना चाहिए खोखले हो जाये न रिश्ते सभीयार उनको भी बचाना चाहिए साथ मिलके खाई थी उसने कसमयाद अब उसको दिलाना…

  • किसी के लिए | Kisi ke Liye

    किसी के लिए ( Kisi ke Liye ) कौन मरता जहाँ में किसी के लिएमर मिटे हम मगर दोस्ती के लिए तुग़लक़ी देते फ़रमान वो हैं सदामारे निर्दोष भी बंदगी के लिए ग़ैर की बाँह में प्यार को देखकरचाँद रोता रहा चाँदनी के लिए आज छाई उदासी चमन में बहुतकोई भँवरा मरा है कली के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *